सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए गुरुवार को रक्षा खरीद परिषद ने सेना और वायुसेना के लिए 384 हल्के हेलिकॉप्टरों की खरीदी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
रक्षा सूत्रों ने बताया कि सेना की बढ़ी हुई जरूरतों के हिसाब से 259 हेलिकॉप्टर खरीदे जाएँगे, जबकि वायुसेना के लिए 125 हेलिकॉप्टरों की खरीदी की जाएगी। इस सौदे की लागत लगभग छः हजार चार सौ करोड़ रुपए होने का अनुमान है।
इसमें पचास प्रतिशत ऑफसेट का प्रावधान रखा गया है। इसका अर्थ यह है कि इस सौदे के लिए चुनी गई विदेशी कंपनी को अनुबंध की रकम का 50 प्रतिशत निवेश भारतीय कंपनियों में ही करना होगा।
रक्षामंत्री एके एंटोनी की अध्यक्षता में हुई परिषद की बैठक में तय किया गया कि सेना के लिए खरीदे जाने वाले 259 हेलिकॉप्टरों में से 197 हेलिकॉप्टरों की खरीदी सीधे कंपनी से की जाएगी। बाकी 187 हेलिकॉप्टर प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के तहत हिन्दुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड (एचएएल) में तैयार किए जाएँगे।
यूरोकॉप्टर से सौदा रद्द : सेना के लिए 197 हेलिकॉप्टरों का सौदा यूरोकॉप्टर के साथ अंतिम चरण में पहुँच चुका था, लेकिन इसे ऐन मौके पर गत 6 दिसंबर को रद्द कर दिया गया, क्योंकि यूरोकॉप्टर ने मुकाबले में उतरे अमेरिका के बेल हेलिकॉप्टर के सामने अपने असैन्य हेलिकॉप्टर भेज दिए थे।
केंद्रीय सतर्कता आयोग के ऐतराज के बाद यह सौदे की प्रक्रिया खारिज कर दी गई थी। हेलिकॉप्टरों के ताजा टेंडर के बारे में सेना इस बात पर अड़ी थी कि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के तहत हेलिकॉप्टर एचएएल में बनाए जाने के बजाए सीधे कंपनी से खरीदे जाएँ।
क्योंकि उसे सियाचिन की ऊँची चोटियों पर बैठे जवानों की जीवन रेखा समझे जाने वाले चीतक और चेतक हेलीकॉप्टर बूढ़े हो चले हैं।
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