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भारतीय नौसेना ने रचा इतिहास
कमांडर सत्यव्रत दाम और उनकी टीम ने धरती की छत पर चढ़कर तिरंगा फहराने के साथ ही भारतीय नौसेना को विश्व का ऐसा पहला संगठन बनने का गौरव दे दिया जो माउंट एवरेस्ट समेत धरती के तीनों ध्रुवों पर विजय हासिल कर चुका है।

कमांडर दाम ने बुधवार को भारतीय समयानुसार 20 बजकर 16 मिनट पर उत्तरी ध्रुव में ग्राउंड जीरो पर कदम रखा और गुरुवार को वहीं से उपग्रह फोन से मीडिया से बातचीत की। पत्रकारों ने कमांडर दाम से जानना चाहा कि वे धरती की छत पर खड़े होकर दुनिया को क्या संदेश देना चाहते हैं, तो उन्होंने कहा कि मैं अपने सामने तिरंगा लहराते हुए देख रहा हूँ और मुझे भारतीय होने पर गर्व है।

कमांडर दाम ने उत्तरी ध्रुव के नजारे का बयान करते हुए कहा कि हमारे सामने पूर्व की ओर कुछ पीले तंबू लगे हैं, आकाश एकदम नीला नहीं है और सूरज 20 डिग्री तिरछा होकर तीखी रोशनी बिखेर रहा है।

हर तरफ बर्फ पसरा है : उन्होंने कहा- सूरज की किरणें लाल नहीं बल्कि थोड़ी संतरी रंग की खूबसूरत आभा बिखेर रही हैं। दूर-दूर तक सिर्फ बर्फ पसरी है। और हम इस जमे हुए समंदर के बीचो-बीच खड़े हैं। हमने यहाँ चार तंबू लगाए हैं। शून्य से 32 डिग्री कम तापमान के बीच सीना चीरने वाली हवाएँ चल रही हैं।

कुछ याद नहीं आ रहा : कमांडर दाम से यह दिलचस्प सवाल भी पूछा गया कि उन्हें 120 किलो की स्लेज घसीटते हुए क्या ख्याल मन में आ रहे थे और क्या उन्हें छठे वेतन आयोग की सिफारिशों से खीज नहीं हो रही थी। इस पर कमांडर ने हंसते हुए कहा बर्फानी हवा और हिमखंडों की गहरी दरारों के सामने कुछ याद नहीं आ रहा था। मन में बस उत्तरी ध्रुव के खतरनाक भालू सामने आने का डर था लेकिन वह मिला नहीं।

धरती, समदंर और पहाड़ : तीनों ध्रुवों यानी एवरेस्ट, दक्षिण ध्रुव और उत्तरी ध्रुव के अभियानों में उन्हें कौन से ध्रुव का अभियान सबसे कठिन लगा, इस सवाल पर उन्होंने कहा दक्षिण ध्रुव जमी हुई धरती था और यहाँ जमा हुआ समंदर है। तीसरा ध्रुव एवरेंस्ट बर्फ का पहाड़ था। ठंड हर जगह एक सी है और चुनौतियों भी एक सी हैं। उन्होंने कहा हमने दुनिया का तल देख लिया, आज छत भी देख ली।
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