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खामोश दुश्मन पर फतह की तैयारी!
पद्मा का बेटा गर्मी से परेशान हो रहा था। उसने कूलर चला लिया और बच्चे को राहत हो गई। बच्चे को सुलाकर वह रसोई का काम करने चली और शाम तक बच्चा का गला, व नाक बंद। रात होने को आई और उसको बुखार भी आ गया। अगले दिन डॉक्टर ने बताया इसे निमोनिया हो गया।

डॉक्टर ने पद्मा से कहा कि आप समय पर लालू को न लाती तो यह गंभीर रूप से चपेट में आ जाता। शायद आप जानती नहीं कि हर साल देश में 4,00,000 बच्चे निमोनिया की भेंट चढ़ जाते हैं। इसीलिए सरकार इसका वैक्सीन लाने की तैयारी में है।

हालाँकि पद्मा के बेटे को समय पर उपचार मिलने से वह ठीक भी हो गया और अब स्वस्थ है। इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर इस संक्रामक रोग के लिए वैक्सीन तैयार करने में लगी है। देश में पाँच साल से कम उम्र के बच्चों को यदि निमोनिया होता है और यदि उस पर ध्यान नहीं दिया गया तो वह बहुत जल्दी मामला गंभीर हो सकता है।

इस अकादमी के अध्यक्ष आरके अग्रवाल बताते हैं कि हर साल करीब 1,00,000 बच्चों को बचा लिया जाता है। इसके लिए तैयार होने वाली औषधि का नाम पीसीवी 7 है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम के तहत यह औषधि प्रस्तुत की जाएगी। देश के करीब 150 शिशु रोग विशेषज्ञ कुछ समय पहले यहाँ जमा हुए थे। उन्होंने निमोनिया और अन्य संक्रामक रोगों के बारे में अपने विचार पेश किए।

निमोनिया को आसानी से काबू में लाया जा सकता है। यह फेफड़ों में संक्रमण पैदा करती है। इस बीमारी में निमोकोकस बैक्टीरिया आधे से ज्यादा मामलों में सक्रिय रहता है। इसकी वजह से रक्त व कान में भी संक्रमण हो सकता है। साथ ही इससे मस्तिष्क ज्वर होने की भी आशंका बनी रहती है।
कई कारणों से होता है

यह रोग कई कारणों से हो सकता है। जहाँ तक पद्मा का मामला है तो उसने जब कूलर चालू किया था तो पिछले साल कूलर में लगी घास निकाली नहीं और पुरानी घास वाला ही कूलर शुरू कर दिया। इस वजह से घास में जमा कीटाणु उसके बेटे को इस बीमारी की चपेट में ले आए। इसका प्रमुख कारण है परजीवी। इसके अलावा फेफड़ों में किसी तरह का जख्म होने के कारण भी यह हो सकता है।

जिन लोगों को निमोनिया होता है उन्हें कफ होता है, कई बार पीला और हरा। उन्हें तेज बुखार आता है। गहरी साँस लेने पर छाती में हल्का दर्द भी होता है। कई समय यह बीमारी इतनी खतरनाक होती है कि इससे पक्षाघात भी होने की आशंका हो जाती है। हालाँकि यह माना जा रहा है कि वैक्सीन की कीमत ज्यादा हो सकती है, लेकिन आने वाले मसय में इसमें कमी आ सकती है। (नईदुनिया)
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