प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने कहा कि अफ्रीका के साथ हर क्षेत्र में सहयोग मजबूत करने के मामले में भारत चीन या किसी अन्य देश के साथ होड़ में नहीं है।
पहले भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन के समापन पर अफ्रीकी नेताओं के साथ साझा संवाददाता सम्मेलन में डॉ. सिंह ने कहा- हम चीन या किसी अन्य देश के साथ होड़ या स्पर्धा में नहीं हैं। अफ्रीका के साथ सहयोग निरंतर मजबूत करने का हमारा फैसला कोई नई बात नहीं है। हमारा साझा औपनिवेशिक अतीत रहा है तथा आजाद होने के बाद हमने मिलकर काम किया है।
इससे पहले प्रधानमंत्री ने अपने आरंभिक उद्बोधन में कहा कि उन्होंने अफ्रीकी नेताओं से अनौपचारिक विचार-विमर्श के दौरान अफ्रीका में हरित क्रांति लाने में भारत की मदद की पेशकश की है।
डॉ. सिंह ने 14 अफ्रीकी देशों के राष्ट्राध्यक्षों, शासन प्रमुखों, वरिष्ठ मंत्रियों और प्रतिनिधियों की मौजूदगी में दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मंगलवार को घोषणा की थी कि भारत अफ्रीका के 34 देशों समेत विश्व के सभी 50 अल्प विकसित देशों के निर्यात पर शुल्क माफी की छूट तथा अपने बाजार में इन देशों के सामान को तरजीह देगा। प्रधानमंत्री के साथ संवाददाता सम्मेलन में तंजानिया के राष्ट्रपति जकाया मिरशो किकवेटे और अफ्रीकी संघ आयोग प्रमुख अल्फा उमर कोनारे भी मौजूद थे।
डॉ. सिंह ने कहा कि भारत-अफ्रीका पर विकास का कोई तरीका थोपना नहीं चाहता तथा यह अफ्रीका को तय करना है कि वह विकास का कौन-सा रास्ता अपनाता है। उन्होंने कहा कि भारत को अफ्रीका की विकास प्रक्रिया में भागीदार बनकर खुशी होगी।
तंजानिया के राष्ट्रपति ने कहा कि भारत अपने अनुभव और विशेषज्ञता के बल पर अफ्रीकी देशों में हरित क्रांति लाने में मदद कर सकता है।
उन्होंने कहा कि सम्मेलन में इस बात पर सहमति रही कि संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष जैसी संस्थाओं में सुधार की तत्काल जरूरत है, ताकि उन्हें ज्यादा लोकतांत्रिक चरित्र दिया जा सके।
उन्होंने कहा कि भारत और अफ्रीका दोनों संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सदस्यता के लिए एक-दूसरे को समर्थन देने पर राजी हैं।
सम्मेलन के समापन पर दो दस्तावेज जारी किए गए- दिल्ली घोषणा-पत्र और भारत-अफ्रीका सहयोग दृष्टि-पत्र। इनमें भारत और अफ्रीका के बीच सहयोग की भावी रूपरेखा तय की गई है। सम्मेलन में खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन समेत कई मुद्दों पर चर्चा की गई।
सम्मेलन में दक्षिण अफ्रीका, युगांडा, तंजानिया, घाना, सेनेगल और कांगो के राष्ट्रपति, नाइजीरिया और जाम्बिया के उपराष्ट्रपति, बुर्किना फासो और इथियोपिया के प्रधानमंत्री, अल्जीरिया, मिस्र, केन्या और लीबिया के वरिष्ठ मंत्री और प्रतिनिधि तथा अफ्रीकी संघ आयोग की प्रमुख ने हिस्सा लिया।
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