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107 सैन्य अधिकारियों ने माँगी सेवानिवृत्ति
छठे वेतन आयोग की सिफारिशों से असंतोष
अधिकारियों की कमी की मार झेल रही सशस्त्र सेनाओं में वरिष्ठ स्तर पर अधिकारियों में सेवाएँ छोड़कर जाने की प्रवृत्ति में एकाएक तेजी आ गई है। माना जा रहा है कि इसका कारण छठवें वेतन आयोग की सिफारिशों से असंतोष हो सकता है।

वेतन आयोग द्वारा 24 मार्च को अपनी सिफारिशें सौंपे जाने के बाद पिछले एक पखवाड़े में सेना, नौसेना और वायुसेना के कुल 107 अधिकारियों ने समयपूर्व सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा ‍कि इस प्रकार के और आवेदन किए जा सकते हैं क्योंकि लेफ्टीनेंट कर्नल, कर्नल तथा इसके ऊपर के अधिकारी वेतन आयोग की रिपोर्ट में महज 15 फीसदी की वृद्धि से संतुष्ट नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि सामान्य परिस्थिति में सेना प्रति सप्ताह समयपूर्व सेवानिवृत्ति के दो से चार आवेदनों पर विचार करती है, लेकिन पिछले दो से तीन हफ्तों में यह संख्या बढ़कर 10 से 15 हो गई है।

सेवा छोड़कर जाने की यह ताजा प्रवृत्ति सशस्त्र बलों के लिए भारी साबित हो सकती है, क्योंकि सेना में जहाँ 11 हजार अधिकारियों की कमी है, वहीं नौसेना और वायुसेना में क्रमश: तीन हजार और छह हजार अधिकारियों की दरकरार है।
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