उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि संपत्ति का अधिकार संविधान और मानवाधिकार से जुड़ा है, जिससे व्यक्ति को वंचित नहीं किया जा सकता सिवाय वैधानिक परिस्थितियों को छोड़कर।
उच्चतम न्यायालय ने कहा संपत्ति का अधिकार यद्यपि लंबे समय तक मूलभूत अधिकार नहीं है, लेकिन यह संवैधानिक अधिकार है। यह मानवाधिकार से भी जुड़ा है। किसी आवश्यकता के प्रावधान के बिना ही व्यक्ति को इस अधिकार से वंचित किए जाने का न्यायालय समर्थन नहीं करेगा।
शीर्ष अदालत ने कर्नाटक स्टेट फाइनेंशियल कार्पोरेशन की अपील को खारिज करते हुए यह व्यवस्था दी। कंपनी ने अपनी अपील में उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी थी।
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक कंपनी का ऋण न लौटा पाने वाले निश्चित प्रतिभूति धारकों और गारंटरों की संपत्ति के अधिग्रहण के लिए कार्पोरेशन द्वारा शुरू की गई कार्रवाई को खारिज कर दिया था।
कर्नाटक स्टेट फाइनेंशियल कार्पोरेशन के विभिन्न नियम कानूनों की व्याख्या करते हुए उच्चतम न्यायालय ने कहा कि धारा 31 के तहत वह संपत्ति अधिग्रहण जैसी कार्रवाई जिला न्यायाधीश को आवेदन दायर करने के बाद ही कर सकती है।
ऐसे मामले में जहाँ अदालत को अधिग्रहण के अधिकार और अधिकार के संरक्षण के बीच तुलना करनी है, वहाँ फैसला उसी व्यक्ति के पक्ष में जाएगा, जो संपत्ति से वंचित होने जा रहा है। जब तक कोई उचित प्रावधान न हो तब तक गारंटरों की संपत्ति का अधिग्रहण करना अवैध है।
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