कांग्रेस के दो युवा नेताओं ज्योतिरादित्य सिंधिया और जितिन प्रसाद को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने के बावजूद राहुल गाँधी को उसमें जगह नहीं दिए जाने पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने रविवार को कहा कि वे तो अपने बेटे को सरकार में शामिल कराने की इच्छुक थीं, लेकिन उन्होंने पार्टी के काम को प्राथमिकता दी।
राष्ट्रपति भवन में सात नए मंत्रियों को शपथ दिलाए जाने के लिए आयोजित समारोह के बाद सोनिया ने कहा कि वे और अधिक युवा सांसदों को मंत्रिमंडल में देखना चाहती थीं, लेकिन गठबंधन राजनीति के कारण ऐसा संभव नहीं हुआ।
सोनिया ने कहा कि मैं राहुल को सरकार में देखना चाहती थी, लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया। राहुल ने कहा कि उनके ऊपर युवा कांग्रेस की जिम्मेदारियाँ हैं और मंत्री बनने पर वह दोनों दायित्वों के साथ न्याय नहीं कर पाएँगे।
उन्होंने कहा कि चूँकि राहुल सरकार में शामिल होने के इच्छुक नहीं थे, इसलिए वे इसमें ज्यादा कुछ नहीं कर सकीं, क्योंकि वे उनकी सोच का सम्मान करती हैं।
देशमुख को जीवनदान : कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने महाराष्ट्र सरकार को पूरी तरह स्थिर बताकर राज्य के मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख को जीवनदान दे दिया।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की स्थिति पूछे जाने पर सोनिया ने कहा कि बहुत स्थिर है, सब जगह स्थिर है। सोनिया के इस बयान से पार्टी हाईकमान द्वारा देखमुख को बदलने संबंधी अटकलें कुछ महीने के लिए रुक गई हैं।
आज होने वाले मंत्रिमंडल के विस्तार के बारे में भी इस बात की चर्चाएँ चल रही थीं कि देखमुख को केंद्र में शामिल किया जा सकता है और उनके स्थान पर ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है।
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