बीच आकाश में विमान का निकास द्वार खोलने का कथित तौर पर प्रयास करने से जुड़े पाँच साल पुराने मामले में यहाँ की एक अदालत ने एक व्यक्ति को मानव जीवन और सुरक्षा को खतरे में डालने संबंधी आरोपों से बरी कर दिया।
अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट एके कुहार ने कहा अभियोजन पक्ष को इस मामले में अभियुक्त की अविवेकपूर्ण अथवा लापरवाह हरकत को साबित करना था।
हालाँकि अभियोजन पक्ष द्वारा जिन गवाहों का परीक्षण किया गया उन्होंने अभियुक्त की ओर से किसी तरह का उतावलापन दिखाए जाने अथवा लापरवाही बरते जाने की बात नहीं कही।
गौरतलब है कि अभियुक्त हरविंदरसिंह पर भारतीय दंड संहिता की धारा 336 के तहत मानव जीवन और सुरक्षा को खतरे में डालने का आरोप लगाया गया था।
|