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जमीयत उलेमा-ए-हिन्द में विभाजन
मुस्लिम संगठनों में सबसे पुरानी और काफी असर रखने वाली जमीयत उलेमा-ए-हिन्द में औपचारिक रूप से आज विभाजन हो गया और मौलाना महमूद मदनी वाले गुट से यह दावा किया कि उनकी ही असली जमीयत हैं और किसी दूसरे गुट का कोई वजूद नहीं है।

जमीयत उलेमा-ए-हिन्द देश की आजादी पूर्व से ही चली आ रही है, लेकिन इसमें हमेशा अंदरूनी खींचतान रही है। यह गुटीय संघर्ष उस समय लोगों के सामने आ गया, जब उसके महासचिव महमूद मदनी खुलकर सामने आ गए और अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के खिलाफ बयान दिया। इसके बाद इस वर्ष छह मार्च को उन्हें जमीयत से निकाल दिया गया।

इसके बाद अरशद मदनी ने जमीयत की एक कार्यकारी समिति बनाई और दावा किया कि उनकी ही जमीयत वास्तविक है।

जमीयत की केन्द्रीय प्रबंध समिति की एक बैठक में संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष मोहम्मद उस्मान को उसका अध्यक्ष चुन लिया गया और मौलाना महमूद मदनी उसके महासचिव चुने गए। इस बैठक में विभिन्न प्रदेशों से उसके सैकड़ों प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

इस बैठक में अरशद मदनी और उनके समर्थकों को निकालने के फैसले की भी पुष्टि दो पर्यवेक्षक सेवानिवृत्त न्यायाधीश नसीमुद्दीन सिद्दीकी और आईटीपीओ महाप्रबंधक सफदर हुसैन की मौजूदगी में की गई।

प्रबंध समिति ने एक प्रस्ताव में कहा कि अरशद मदनी जमीयत विरोधी गतिविधियों में संलग्न थे और उन्होंने चुनी हुई इकाइयों को भंग करके अपना शासन लाने का प्रयास किया था।
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