भारत को कृषि क्षेत्र में दुनिया की महाशक्ति बनाने के लिए देश में दूसरी हरित क्रांति लाने का आज आह्वान करते हुए राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने आर्थिक वृद्धि और सामाजिक न्याय के लिए समान भाव से काम करने की जरूरत पर जोर दिया।
श्रीमती पाटिल ने कहा कि हमें दूसरी हरित क्रांति की आवश्यकता है, जिससे हमारी कृषि उत्पादकता बढ़े तथा देश कृषि क्षेत्र में महाशक्ति बन सके। राष्ट्रपति ने यहाँ बाबू जगजीवनराम शती समापन व्याख्यान देते हुए नीति निर्माताओं, कृषि वैज्ञानिकों और किसानों का आह्वान किया कि वे इस उद्देश्य के लिए काम करें।
श्रीमती पाटिल ने यह अपील ऐसे समय की है, जब कृषि विकास दर अपेक्षित स्तर पर नहीं पहुँच पा रही है तथा खेती में सरकारी निवेश बढ़ाने की माँग जोर पकड़ती जा रही है।
दुनिया में सबसे तेजी से विकसित भारतीय अर्थव्यवस्था के निरन्तर आगे बढ़ने की उम्मीद जताते हुए राष्ट्रपति ने समाज के कमजोर और गरीब तबकों को इस विकास यात्रा में शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यह हमारा संवैधानिक और नैतिक कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय और विकास के प्रयास साथ-साथ चलने चाहिए।
शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए श्रीमती पाटिल ने कहा कि कमजोर वर्गों के बच्चों के शिक्षा के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि कमजोर और पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए शैक्षिक योजनाओं को अमल में लाया जाना चाहिए तथा उनकी प्रगति पर नजर रखनी चाहिए।
समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बाबू जगजीवन राम को आजाद भारत के सबसे कद्दावर नेताओं में से एक बताया तथा कहा कि उनका जीवन लोकतांत्रिक भारत में दलितों की मुक्ति और प्रगति का प्रतीक है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री और बाबू जगजीवनराम की पुत्री मीरा कुमार ने भी समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर कई केन्द्रीय मंत्री और सांसद मौजूद थे।
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