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पूरे जहान में खाने के लाले
हम भुखमरी का एक नया चेहरा देख रहे हैं। अनाज उपलब्ध है लेकिन फिर भी लोग उसे खरीद नहीं पा रहे हैं। हम सचमुच ऐसे उपाय ढूँढना चाहते हैं ताकि अनाज की आपूर्ति बढ़ जाए और कीमतें कम हो जाएँ ताकि लोग उसे खरीद सकें। यह कहना है विश्व बैंक के अध्यक्ष रॉबर्ट जौलिक का।

जहाँ तक भारत की बात है तो यहाँ पर हर दिन 6 साल से कम के 6000 बच्चे 'भूख और कुपोषण की कुल्हाड़ी' से कट जाते हैं। ग्लोबल हंगर इंडेक्स कहता है कि इसके बाद भी भारत 118 देशों में 94वें स्थान पर है, तो सोचा जा सकता है कि दुनिया के क्या हालात होंगे।

जौलिक ने कहा कि आगामी कुछ वर्षों में खाद्य पदार्थों की कीमतों के बढ़ते रहने की आशंका है। इसे कुछ किसानों के लिए एक अच्छी खबर कहा जा सकता है लेकिन दुनिया के कमजोर और गरीब लोग इस संकट के तले पिस जाएँगे। विश्व बैंक के एक अनुमान के मुताबिक दुनिया में 33 ऐसे देश हैं जहाँ खाने और तेल के चढ़ते दामों की वजह से सामाजिक आंदोलन छिड़ सकता है।

जौलिक ने कहा कि इस वक्त हमारी पहली प्राथमिकता सबसे अधिक जरूरतमंद लोगों की मदद करना होनी चाहिए। जहाँ तक भारत की बात है तो यहाँ पर खाद्यान्न उत्पादन चरम पर है, इसके बाद भी लोग भूख से दम तोड़ते नजर आते हैं। अपने बेटे को खो चुकी जहरुन्निसा कहती है कि वो कुपोषण का शिकार था, उसको मैं दूध-दवा पूरा नहीं कर पाती थी, पैसे के कारण। इस कारण उसकी मौत हो गई। साड़ियों पर एम्ब्रायडरी करने वाली जहरुन्निसा 10 से 15 रु. रोज कमा पाती है।

इधर जौलिक का कहना था कि इसलिए संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम को 50 करोड़ डॉलर की सख्त जरूरत है। इस राहत के ना मिलने पर दुनिया में और भी अधिक लोग भुखमरी का शिकार हो जाएँगे। वहीं बुधवार को विश्व खाद्य कार्यक्रम की अध्यक्ष जोसेट शिरन ने बीबीसी को बताया कि लोगों के लिए खाना खरीदना मुश्किल होता जा रहा है।

जोसेट शिरन का कहना था, 'हम भुखमरी का एक नया चेहरा देख रहे हैं। अनाज उपलब्ध है लेकिन फिर भी लोग उसे खरीद नहीं पा रहे हैं। हम सचमुच ऐसे उपाय ढूँढना चाहते हैं ताकि अनाज की आपूर्ति बढ़ जाए और कीमतें कम हो जाएँ ताकि लोग उसे खरीद सकें।'

जौलिक ने कहा कि विश्व बैंक अफ्रीका में कृषि संबंधी ऋण को लगभग दोगुना कर 80 करोड़ डॉलर तक बढ़ा देगा। उनका कहना था कि इस ऋण से एक नई हरित क्रांति लाने में मदद मिलेगी ताकि कृषि और उससे जुड़े संसाधनों में सुधार लाया जा सके। उन्होंने कहा कि इससे छोटे किसानों की गरीबी को भी दूर किया जा सकता है। विश्व बैंक के अध्यक्ष के अनुसार विश्व व्यापार संगठन को भी व्यापार से जुड़े प्रतिबंधों को हटाने की जरूरत है ताकि विकासशील देशों में किसानों को उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिल सके। (नईदुनिया)
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