चीन के साथ संबंध बिगड़ने की वजह भारत में दलाई लामा के होने को लगभग 71 प्रतिशत भारतीय मानते हैं, जबकि 47 प्रतिशत भारतीयों का मानना है कि इस पड़ोसी देश की नाराजगी के मद्देनजर भारत को तिब्बतियों के धर्मगुरु का खुलकर समर्थन नहीं करना चाहिए।
आउटलुक द्वारा दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता और चेन्नई में किए गए सर्वेक्षण के अनुसार दलाई लामा को मेहमान बनाने से भारत जम्मू-कश्मीर के साथ ही पूर्वोत्तर राज्यों के अलगाववादी नेताओं के लिए चीन के शरणस्थली बनने का खतरा मोल ले रहा है। हालाँकि रायशुमारी में शामिल 50 प्रतिशत लोगों का मानना है कि दलाई लामा की भारत में मौजूदगी से चीन के अंदरुनी मामलों में कोई हस्तक्षेप नहीं हुआ है।
इसी के साथ 70 प्रतिशत लोगों ने चीन के इस मत को खारिज कर दिया है कि हाल ही में तिब्बत की राजधानी ल्हासा में हुई हिंसा के मास्टरमाइंड दलाई लामा थे। इस सर्वेक्षण में यह बात भी उभर कर आई है कि भारत सरकार को तिब्बत मसले पर फूँक-फूँककर कदम रखने चाहिए।
लगभग 64 प्रतिशत भारतीय नहीं चाहते हैं कि भारत तिब्बतियों को चीन का विरोध करने से रोके। लगभग 73 फीसदी लोग दलाई लामा को राजनेता के बजाय बड़े आध्यायिक नेता के रूप में देखते हैं।
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