चार दशकों के एक लंबे अंतराल के बाद पाकिस्तान में बनी एक फिल्म 'खुदा के लिए' को भारत में दिखाया जा रहा है। पाकिस्तानी निर्देशक शोहब मंसूर की इस पहली फिल्म को देशभर के बीस शहरों के 100 सिनेमाघरों में दिखाया जा रहा है।
इस फिल्म की मुख्य भूमिका में पाकिस्तानी कलाकार शान और मॉडल इमाम अली हैं और इसमें मुम्बई के अभिनेता नसरुद्दीन शाह ने एक मौलाना का रोल अदा किया है।
फिल्म का प्रीमियर कल मुंबई में हुआ और भारत में इसकी वितरक कंपनी के अधिकारी अशोक अहूजा ने कहा कि हम उम्मीद कर रहे हैं कि यह फिल्म यहाँ अच्छा कारोबार कर सकेगी।
मंसूर ने एक ई-मेल इंटरव्यू में कहा कि यह एक ऐसे मुसलमान की दुखांत कहानी है, जिसे उसके समाज में इसलिए अच्छा मुस्लिम नहीं माना जाता, क्योंकि वह आधुनिक है और जिसे अपने धर्म के बाहर सिर्फ इसलिए कट्टरपंथी माना जाता है, क्योंकि उसका नाम मुस्लिम है।
इस फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त हुई और यह लाहौर में बसे ऐसे दो संगीत में रुचि रखने वाले भाइयों की कहानी है, जिनमें से एक कट्टरपंथी लोगों के प्रभाव में आ जाता है और दूसरा जब अमेरिका जाता है तो उसे वहाँ इसलिए पकड़ लिया जाता है, क्योंकि उसका नाम उसके मुस्लिम होने का खुलासा करता है।
भारत और पाकिस्तान के बीच 1965 में हुए युद्ध के बाद पाकिस्तान ने अपने यहाँ सभी भारतीय फिल्मों पर प्रतिबंध लगा दिया था और ऐसा ही फैसला पाकिस्तानी फिल्मों के लिए भारत ने लिया था।
हाल ही में भारत की दो बड़ी फिल्में आमिर खान की 'तारे जमीन पर' और अक्षय कुमार और कैटरीना कैफ की 'वैलकम' को पाकिस्तान के सिनेमाघरों में दिखाया गया। भारत के फिल्म निर्माता मुकेश भटट् ने भारत में 'खुदा के लिए' के प्रदर्शन को एक ऐतिहासिक क्षण बताया। मंसूर की इस फिल्म को हाल ही में पाकिस्तान के सितार-ए-इम्तियाज पुरस्कार से नवाजा गया और उसे 31वें अंतरराष्ट्रीय काहिरा फिल्म समारोह में जूरी का विशेष पुरस्कार भी मिला था। कल के प्रीमियर में मुम्बई फिल्म जगत की कई नामी हस्तियों ने भाग लिया, जिनमें सुभाष घई, मधुर भंडारकर और मुकेश भटट् शामिल थे।
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