भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के अध्यक्ष महेंद्रसिंह टिकैत की कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मुद्दे पर उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) शुक्रवार को खुलकर एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए।
टिकैत की अपमानजनक जातिसूचक टिप्पणी मामले में एनसीएससी के निष्क्रिय रहने के सुश्री मायावती के आरोप पर एनसीएससी ने गहरी नाराजगी प्रकट करते हुए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (उत्पीडन रोकथाम) कानून को शिथिल करने के लिए उन्हें आड़े हाथों लिया और कहा कि दलितों के प्रति उनके कार्यों की जाँच की जाएगी।
हालाँकि एनसीएससी ने जातिसूचक टिप्पणी मामले में सुश्री मायावती के साथ पूरी एकजुटता प्रकट करते हुए कहा कि टिकैत के आपत्तिजनक भाषण का पाठ मिलने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। लेकिन साथ ही उसने मायावती सरकार को अनुसूचित जाति के लिए सर्वाधिक अनुचित शासन बताया और उन्हें अपना घर सुव्यवस्थित करने की भी सलाह दी।
आयोग के अध्यक्ष बूटासिंह ने आज कहा कि निष्क्रियता संबंधी सुश्री मायावती के आरोपों और मुख्यमंत्री के निजी स्टाफों के अनुचित आचरण से वह अपमानित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि टिकैत मामले में फोन करने पर सुश्री मायावती का निजी स्टॉफ उन्हें पहचानने से इनकार कर दिया।
इससे पहले सुश्री मायावती ने कथित तौर पर कहा था कि इस मामले में सिंह की चुप्पी यह प्रदर्शित करता है कि वह अपनी आवाज गँवा बैठे है या कांग्रेस के चलते उनका मुँह बंद है। सुश्री मायावती ने सिंह से इस्तीफे की भी माँग की थी।
|