प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका के साथ असैन्य परमाणु सहयोग समझौते को उसके लक्ष्य तक पहुँचाने में सरकार की पूरी सद्इच्छा लगी हुई है और यह समझौता भारत के लिए परमाणु उर्जा कारोबार के नए द्वार खोलेगा।
उन्होंने यह बात ऐसे समय कही है जबकि केंद्र सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामदल इस समझौते के जानी दुश्मन बने हुए हैं। चव्हाण ने यह भी कहा कि निजी कंपनियों को परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सरकारी उपक्रमों के छोटे भागीदार के रूप में आना चाहिए और ऐसी भागीदारी वर्तमान कानून में संशोधन के बिना भी संभव है।
वे शुक्रवार को यहाँ भारतीय परमाणु विद्युत निगम लिमिटेड और भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) के बीच परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण के कारोबार के लिए एक संयुक्त उपक्रम बनाने के लिए सहमति ज्ञापन पर हुए हस्ताक्षर के लिए आयोजित समारोह में बोल रहे थे। समारोह को भारी उद्योग मंत्री संतोष मोहन देव और परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष एवं परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. अनिल काकोडकर ने भी संबोधित किया। चव्हाण ने तीन चरणों वाले भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि परमाणु ऊर्जा विभाग के कठिन प्रयासों और भेल जैसे उपक्रमों के साथ सहयोग की बदौलत भारत परमाणु कार्यक्रम के मामले में आज आत्मनिर्भर है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित समझौते के पूरा होने के बाद भारत के लिए परमाणु व्यापार के ऐसे नए द्वार खुलेंगे जिसमें भारत को विदेशों से यूरेनियम जैसे परमाणु ईंधन का आयात करने का अवसर मिलेगा तथा परमाणु ऊर्जा निगम और भेल जैसे भारतीय उपक्रमों को अपनी परमाणु तकनीक और उपकरण विदेशों में बेचने के अवसर प्राप्त होंगे।
उन्होंने कहा कि भारतीय परमाणु ऊर्जा विभाग की 200 मेगावाट, 540 मेगावाट और 700 मेगावाट के परमाणु रिएक्टरों की प्रौद्योगिकी विश्व के ऐसे बहुत से देशों के लिए उपयुक्त प्रौद्योगिकी है, जो 1000 या 1500 मेगावाट के संयंत्र नहीं ले सकते।
चव्हाण ने कहा कि विश्व भर में परमाणु ऊर्जा की माँग फिर से बढ़ रही है और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे के बीच स्वच्छ ऊर्जा के इस स्रोत का महत्व बढ़ गया है।
निजी क्षेत्र के बारे में उन्होंने कहा कि वर्तमान परमाणु ऊर्जा कानून के अंतर्गत इस क्षेत्र में केवल केन्द्रीय सरकारी कंपनियाँ ही प्रवेश कर सकती हैं।
|