उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 1993 के मुम्बई बम विस्फोट कांड के एक आरोपी की फाँसी की सजा पर शुक्रवार को रोक लगा दी।
मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन और न्यायमूर्ति आफताब आलम ने मुम्बई की टाडा अदालत से मृत्युदंड की सजा पाए जाकिर हुसैन नूर शेख की याचिका पर केन्द्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) को नोटिस भी जारी किया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार जाकिर ने मुम्बई की माहिम फिशर कालोनी में बम फेंका था, जिससे तीन लोगों की मृत्यु हो गई थी और छह घायल हो गए थे।
उच्चतम न्यायालय ने इस मामले के कुछ अन्य आरोपियों को भी नोटिस जारी किए। याचिकाकर्ता ने अपील में कहा है कि टाडा न्यायालय ने साक्ष्यों को नजरअंदाज किया और उसके विरुद्ध साजिश में शामिल होने का कोई साक्ष्य न होने को मान्यता नहीं दी। याचिकाकर्ता ने कहा कि उसकी अपील का निस्तारण होने तक मृत्युदंड पर रोक लगाई जाए।
अभियोजन पक्ष के अनुसार याचिकाकर्ता ने 12 मार्च 1993 को मुम्बई में हुए श्रृंखलाबद्ध बम विस्फोटों की साजिश में प्रमुखता से भाग लिया था। इन विस्फोटों से मुम्बई दहल गई थी और 200 से अधिक लोग मारे गए थे, जबकि एक हजार से अधिक घायल हो गए थे।
इस मामले में 123 लोग अभियुक्त बनाए गए थे, जिनमें से 13 को फाँसी की सजा सुनाई गई थी। अभिनेता संजय दत्त भी इस मामले में आरोपी हैं, उसे अवैध हथियार रखने के मामले में टाडा न्यायालय ने छह वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। उच्चतम न्यायालय में उसकी भी अपील लंबित है। माफिया डॉन दाऊद इब्राहीम और सऊदी अरब के मेमन बंधु इस मामले में भगोड़े घोषित किए गए हैं।
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