महँगाई को काबू में करने की सभी कवायदों के बावजूद इसके तीन वर्ष बाद फिर से सात प्रतिशत पर पहुँच जाने से सरकार की चिंताएँ और बढ़ गई हैं।
बाईस मार्च को समाप्त हुए सप्ताह में महँगाई की दर 0.32 प्रतिशत और बढ़कर सात प्रतिशत पर पहुँच गई। चार दिसंबर 2004 के 7.07 प्रतिशत के बाद महँगाई का यह उच्चतम स्तर है।
वित्त सचिव डी. सुब्बाराव ने महँगाई के सात प्रतिशत पर पहुचँने को चिंताजनक बताते हुए शुक्रवार को कहा कि सरकार कीमतों की लगातार समीक्षा करेगी।
राव ने कहा कि महँगाई का बढ़ना चिंता का विषय है और सरकार स्थिति की लगातार समीक्षा करेगी। कैनरा बैंक के अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक एमबीएन राव ने महँगाई के बढ़ने पर कहा कि रिजर्व बैंक की तरफ से कदम उठाने से इनकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि मौद्रिक नीतियों पर निगाह रखने वालों के लिए महँगाई को काबू करना प्रमुख चिंताओं में है और यह रिजर्व बैंक के वर्ष के लिए लक्षित पाँच प्रतिशत की तुलना में बहुत अधिक है।
समाप्त हुए सप्ताह में महँगाई की दर को बढ़ाने में मुख्य रूप से लोह अयस्क, दाल-दलहन, फल, सब्जियाँ, खाद्य तेल, वनस्पति घी, मक्खन और चीनी का योगदान रहा। सप्ताह के दौरान लोह अयस्क की कीमतों में 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी से खनिजों का सूचकांक 38.2 प्रतिशत के उछाल से 594.8 अंक पर पहुँच गया। महँगाई को काबू में करने के लिए सरकार पिछले दो-ढाई वर्ष से लगातार कदम उठा रही है। पहले चीनी की कीमतों को काबू में करने के लिए इसके आयात की मंजूरी दी गई। इसके बाद गेहूँ और दाल-दलहनों के उबाल को शांत करने के लिए इनके आयात को शुल्कमुक्त किया गया। रिजर्व बैंक महँगाई को नियंत्रण में रखने के लिए ब्याज दरों को कम करने का खतरा नहीं उठा रहा है।
हाल ही में सरकार ने खाद्य तेलों के निर्यात को पूरी तरह बंद किए जाने के बाद सोया तेल और कच्चे पाम तेल का आयात शुल्कमुक्त करने के साथ ही अन्य परिष्कृत तेलों पर सीमा शुल्क को घटाकर मात्र साढ़े सात प्रतिशत कर दिया।
स्टील के दामों को नीचे लाने के लिए सरकार की तरफ से कंपनियों पर निरंतर दबाव है। गैर बासमती चावल के निर्यात पर रोक भी इस दौरान लगाई गई।
एचडीएफसी बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री अभीक बरुआ का कहना है कि अल्पावधि के लिहाज से देखा जाए तो स्थिति काबू से बाहर होती नजर आ रही है। रिजर्व बैंक गवर्नर ने इसी सप्ताह महँगाई को वांछित स्तर से ऊँचा बताया था और कहा था कि इसे रोकने के लिए जिस भी उपाय की जरूरत पड़ेगी, बैंक पीछे नहीं हटेगा।
पंद्रह मार्च को समाप्त हुए सप्ताह में महँगाई 6.68 प्रतिशत और पिछले साल 6.54 प्रतिशत पर थी। बाईस मार्च को समाप्त हुए सप्ताह में महँगाई को बढ़ाने में मुख्य योगदान लोह अयस्क के दामों में भारी बढ़ोतरी का था। इस दौरान दालों तथा फल एवं सब्जियों की कीमत प्रत्येक 1.4 प्रतिशत और सब्जियों की 4.9 प्रतिशत बढ़ गई। हालाँकि मसालों के दाम दो और फलों के एक प्रतिशत नीचे आए। तिलहनों में एक प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
आलोच्य अवधि के दौरान सकल उपभोक्ता वस्तुओं का आधिकारिक थोक मूल्य सूचकांक आधा प्रतिशत बढ़कर 223.6 अंक से 224.8 अंक पर पहुँच गया। इसकी गणना में शामिल 22.02 प्रतिशत का भारांक रखने वाले प्राथमिक वस्तुओं के सूचकांक में 1.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने रोजमर्रा के इस्तेमाल की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में उफान के लिए खुदरा कारोबार में बड़े औद्योगिक घरानों को प्रत्यक्ष रूप से दोषी ठहराते हुए सरकार से इनके बड़े-बड़े भंडारगृहों में बड़ी मात्रा में रखे स्टॉक की जाँच कराकर दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई किए जाने की माँग की है।
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