रंग दे बसंती के बाद अब 'शौर्य' फिल्म पर भारतीय सेना की भृकुटि तनी हुई दिखाई दे रही है और इसे सेना की धर्मनिरपेक्ष छवि पर अँगुली उठाने वाली फिल्म करार दिया जा रहा है।
समर खान के निर्देशन में बनी यह फिल्म शुक्रवार को रिलीज हुई। अगर मामला तूल पकड़ता है तो यह फिल्म भी 'रंग दे बसंती' की तरह विवादों में फँस सकती है। दो साल पहले जब आमिर खान की इस फिल्म पर विवाद उठा था तो तत्कालीन रक्षामंत्री प्रणब मुखर्जी और तीनों सेना प्रमुखों के लिए उसका विशेष शो आयोजित किया गया था। फिल्म देखने के बाद मुखर्जी ने रंग दे बसंती को हरी झंडी दे दी थी।
'शौर्य' फिल्म की आलोचना कर रहे सैन्य अधिकारियों का कहना है कि इसमें सेना की बेदाग धर्मनिरपेक्ष छवि पर आड़े-तिरछे ढंग से सवाल उठाए गए हैं। उनका कहना है कि इसमें कैप्टन जावेद खान पर गद्दारी के आरोप के बहाने यह जाल बुना गया है कि भारतीय सेना में धर्म के आधार पर अफसरों के साथ भेदभाव होता है।
समर की इस फिल्म में सेना के दो वकील, मेजर सिद्धांत चौधरी और मेजर आकाश कपूर कैप्टन जावेद के मामले में आमने-सामने हैं और ब्रिगेडियर रुद्रप्रतापसिंह कैप्टन जावेद पर सेना में गदर भड़काने का आरोप लगाते हैं।
सेना के वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि इस फिल्म में मीडिया को भी ढाल बनाया गया है और पत्रकार काव्या को सचाई की हिमायती के रूप में पेश कर सेना की छवि पर चोट की गई है।
इस फिल्म में सेना में आपसी गोलीबारी की घटना को केंद्र में रखा गया है और इस विषय पर बनी यह पहली फिल्म है। भारतीय सेना में हाल के वर्षों में आत्महत्या और आपसी गोलीबारी की घटनाओं के कारण काफी चिंता का माहौल था और अब यह विषय फिल्म का मसाला भी बन गया है। संभवत: यह बात भी सैन्य अधिकारियों को नागवार गुजरी है।
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