देश की तीनों सेनाएँ अफसरों की भारी कमी से पहले ही जूझ रही हैं वहीं उससे बड़ी चिंता की बात यह है कि इन अधिकारियों को तैयार करने वाली देहरादून स्थित विख्यात भारतीय सैन्य अकादमी में भी दाखिला लेने वाले कैडेटों की संख्या में भारी गिरावट आ गई है।
सरकार और सेना इस बात से काफी परेशान है कि अथक प्रयासों के बाद भी सामाजिक आर्थिक परिवेश बदलने युवा पीढ़ी की करियर वरीयताओं का नजरिया बदलने तथा अन्य क्षेत्रों में अधिक पैसा देने वाले रोजगार के अवसरों की उपलब्धता के कारण सेना के प्रति लोगों का रूझान कम से कम तर होता जा रहा है।
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि इस समय सेना 11153 नौसेना 1403 और वायुसेना 1368 अधिकारियों की कमी से जूझ रही है। उन्होंने बताया कि सेना में भर्ती के लिए प्रतिभाशाली युवाओं को आकृष्ट करने के लिए तीनों सेनाओं ने कई कदम उठाए हैं।
इन प्रयासों के तहत अल्पकालिक सेवा कमीशन के अफसरों सहित सभी अफसरों को क्रमश: 26 और 13 वर्ष की संगणनीय सेवा के बाद कैप्टन मेजर और लेफ्टिनेंट कर्नल का मूल रैंक धारण करने का पात्र बनाया गया है।
रक्षा सूत्रों ने बताया कि सेनाओं में अधिकारियों की इस कमी को दूर करने की कोशिशों के तहत लेफ्टिनेंट कर्नल के 750 पदों का दर्जा बढ़ाकर उन्हें कर्नल रैंक का कर दिया गया है। इसके अलावा अल्पकालिक सेवा कमीशन अफसरों का कार्यकाल भी 10 वर्ष से बढ़ाकर 14 वर्ष कर दिया गया है।
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