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सरबजीत के गाँव पहुँचे बर्नी
पाकिस्तान के पूर्व कार्यवाहक मानवाधिकार मंत्री अंसार बर्नी सरबजीतसिंह को निर्दोष साबित करने के संबंध में उचित सबूतों को जुटाने के लिए यहाँ पहुँच गए हैं, ताकि राष्ट्रपति से उसे क्षमा दिलाने का पुख्ता मामला बनाया जा सके।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की सलाहकार समिति के सदस्य बर्नी ने भारत और पाकिस्तान से संयुक्त प्रत्यर्पण पहल करने को भी कहा, जिसमें आतंकवादियों को छोड़कर बंदियों की रिहाई एक साथ की जाए। यह पहल बंदियों के परिवार के प्रति मानवता प्रदर्शित करने के लिए की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि मैं सरबजीतसिंह के पैतृक गाँव भिखीविंड जा रहा हूँ, ताकि उसके परिवार से उसकी मासूमियत के बारे में उचित सबूत एकत्र किए जा सकें। इसके बाद मैं पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को इस बात के लिए संतुष्ट करने की स्थिति में आ जाऊँगा कि उसकी मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदला जाए।

बर्नी ने कहा कि यदि सरबजीत आतंकवादी है तो भी उसके परिवार का कोई दोष नहीं है तथा मुझे यह नहीं समझ में आता है कि वे क्यों परेशान हों, लेकिन यदि वह मासूम है तो मैं अपनी जान की बाजी लगा दूँगा।

हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि वे आतंक की गतिविधियों में शामिल लोगों को क्षमादान देने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि मुझे आतंकवादियों से कोई सहानुभूति नहीं है तथा मेरा संगठन उनके मामले कभी नहीं लेगा। आतंकवादियों से देश के कानून के तहत निपटा जाना चाहिए, भले ही वह पाकिस्तान हो या भारत।

लाहौर की कोट लखपत जेल में एक अप्रैल को सरबजीत को फाँसी पर लटकाने के लिए मौत का फरमान जारी हो गया था, लेकिन मुशर्रफ ने भारत सरकार के अनुरोध के बाद इसे एक माह के लिए टाल दिया।

सरबजीत को लाहौर में 1989 में हुए सिलसिलेवार विस्फोटों के लिए दोषी ठहराया गया था, जिसमें 14 लोगों की जानें गई थीं।
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