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एनिमेशन पर मुग्ध बड़े बैनर
आने वाले समय में भारतीय एनिमेशन उद्योग पूरा परिदृश्य बदलकर रख देगा। ब़ड़े-ब़ड़े बैनर इस ओर तेजी से आ रहे हैं। इनमें यशराज और यूटीवी शामिल हैं। भारत में एनिमेशन को करियर बनाने वाले भी काफी हैं। फिलहाल 3 से 3.50 लाख छात्र इस विधा का प्रशिक्षण ले रहे हैं।

उद्योग से जु़ड़े राम मोहन का कहना है कि यशराज हो या यूटीवी और एडलेब्स, सभी अपने ब़ड़े बजट की फिल्मों को एनिमेशन विधा में पेश करने की तैयारी में हैं। इससे इस बाजार में भारी तेजी आ सकती है। उद्योग के पितामह के रूप में जाने वाले श्री राम मोहन का करियर काफी लंबा है।

'मीना', यूनिसेफ की 'गर्ल चाइल्ड' और 'रामायण : द लीजेंड ऑफ प्रिंस राम' उन्हीं की कृति है। पिछले दिनों उन्हें ब्रिटिश उच्चायुक्त की ओर से बेस्ट एनिमेटेड फ्रेम्स का पुरस्कार मिला। मुंबई में ग्रेफिटी स्टूडियो चलाने वाली इस शख्सियत का एक शगल एनिमेशन स्कूल चलाना भी है।

यशराज की 'रोडसाइड रोमियो' आ रही है। इसने वॉल्ट डिज्नी स्टूडियो' से तीन फिल्मों के लिए अनुबंध किया है। दक्षिण भारत के रजनीकांत भी 3-डी एनिमेशन फिल्म 'सुल्तान-द वॉरियर' में होंगे। यह फिल्म उनकी बेटी बना रही है। करण जौहर इन दिनों अपनी सुपर-डुपर हिट 'कुछ-कुछ होता है' का रीमेक बना रहे हैं, जो एनिमेटेड होगा।

इसके अलावा एनिमेशन विधा की खास हस्ती सिमी नालासेठ 'द ड्रीम ब्लैंकेट' बना रही है। यह तिब्बती कथा पर आधारित है और बनाने वाली कंपनी यूटीवी मोशन पिक्चर्स है।

गोविंद निहलानी जैसे गंभीर फिल्म निदेशक भी एनिमेटेड 'कमलू' तैयार कर रहे हैं। यह एक ऊँट के बच्चे की कहानी है, जो राजस्थान में रोमांच पैदा करता है। ये अधिकांश फिल्में इसी साल रिलीज होने वाली हैं।

इतना होने के बाद भी अभी भारतीय एनिमेशन उद्योग दुनिया के नक्शे में कही नहीं है। हमारी सबसे ब़ड़ी कमी यह है कि हम अंतरराष्ट्रीय स्तर का लेखन नहीं कर पा रहे हैं। दरअसल लेखन अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को निगाह में रखकर किया जाना चाहिए।

पश्चिम के देशों के मुकाबले हमारे यहाँ बुनियादी सुविधाएँ ज्यादा हैं। हमारी गुणवत्ता अच्छी है, पहले यह बाजार केवल आउटसोर्सिंग के लिए इस्तेमाल होता था, लेकिन अब बेहतर उत्पादों के साथ प्रतिस्पर्धा को तैयार है।

होम वीडियो में बिक्री बढ़ी : राममोहन का कहना है कि भारतीय एनिमेशन फिल्में कहीं कमजोर नहीं हैं। 'हनुमान' और 'बाल गणेश' ने यह साबित कर दिया है कि गुणवत्ता के मामले में ये किसी से कम नहीं हैं। विशेष रूप से बच्चे इसकी ओर तेजी से आकर्षित हुए।

यह सही है कि बॉक्स ऑफिस पर ये फिल्में सफल नहीं रहीं, लेकिन इनके होम वीडियो की बिक्री खासी हुई। इसके अलावा इनको खिलौनों और स्टेशनरी से भी काफी फायदा हुआ, क्योंकि इसके चरित्रों के खिलौने भी खूब बिके। इन फिल्मों में किरदार का खासा महत्व होता है।
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