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‍दिल्ली पुलिस रिश्वतखोरी में अव्वल
आम आदमी की सेवा का दावा करने के बावजूद दिल्ली के सभी महकमों के मुकाबले पुलिस विभाग रिश्वतखोरी के मामलों में सबसे अव्वल है।

राज्य के विभिन्न विभागों के कर्मचारियों और अधिकारियों पर वर्ष 2007 में रिश्वत लेने के 34 मामले दर्ज किए गए थे। इन 34 मामलों में से 15 मामले खाकी वर्दी वालों के खिलाफ दर्ज हुए।

दिल्ली विधानसभा में हाल में राज्य सरकार के सतर्कता विभाग के आँकड़ों में बताया गया कि पुलिस महकमे के 17 अधिकारियों पर भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए गए हैं और उन्हें कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।

राज्य सरकार के विभागों में दिल्ली पुलिस के बाद नगर निगम और राज्य परिवहन प्राधिकरण का नाम आता है, जिनके क्रमश: चार और तीन कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले दर्ज हुए हैं।

वर्ष 2007 के दौरान राज्य सरकार के वित्त विभाग और नई दिल्ली नगर निगम परिषद के खिलाफ भ्रष्टाचार के दो-दो मामले प्रकाश में आए, जबकि दिल्ली जल बोर्ड, शिक्षा, वक्फ बोर्ड, दिल्ली परिवहन निगम, स्वास्थ्य विभाग और अन्य विभागों के खिलाफ एक-एक मामला दर्ज हुआ।

सतर्कता विभाग के आँकड़ों के मुताबिक दिल्ली सरकार के कुल 37 कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए गए हैं जिनमें से 17 खाकी वर्दी वाले हैं।

सतर्कता विभाग के आँकड़े अधिकारियों और आम आदमी में साठगाँठ की ओर संकेत करते हैं। विभाग ने कम से कम आठ गैर अधिकारियों के विरुद्ध रिश्वत और भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किए हैं।

इसके अलावा कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ 15 मामलों में आरोप-पत्र दाखिल किए गए। छह अधिकारियों के खिलाफ मामलों को संबंधित विभागों को विभागीय कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया।

ऐसा नहीं है कि मौजूदा वर्ष में पिछले वर्ष के मुकाबले आँकड़ों में कोई सुधार नजर आ रहा है। अभी तीन माह ही बीते हैं और सतर्कता विभाग नगर निगम के तीन अधिकारियों के खिलाफ अपने पद और ताकत का दुरुपयोग करने के मामले दर्ज कर चुका है।
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