समकालीन मुसलमानों की समस्याओं और द्वंद्व को दिखाते पाकिस्तानी निदेशक शोएब मंसूर निर्देशित फिल्म 'खुदा के लिए' पूरे विश्व में प्रशंसा बटोरने के बाद भारत में रुपहले पर्दे पर आने को तैयार है। मंसूर की फिल्म खुदा के लिए भारत में चार अप्रैल को प्रदर्शित होगी और दशकों बाद यह पहली पाकिस्तानी फिल्म होगी जो आधिकारिक तौर पर भारत में प्रदर्शित की जाएगी।
मंसूर ने बताया कि इस फिल्म में समकालीन मुसलमानों की समस्याओं और द्वंद्व को दिखाया गया है। यह फिल्म मुसलमानों के प्रति विश्वभर में नफरत प्रदर्शित करने के खिलाफ उनकी नाराजगी का परिणाम है। इस फिल्म में 11 सितंबर 2003 की घटना के बाद कट्टरपंथियों और गैर तार्किक सनकियों के बीच फँसे उदारवादी मुसलमानों की आवाज बुलंद की गई है। मंसूर ने कहा कि मैं उदारवादी मुसलमानों की त्रासदी को दिखाना चाहता हूँ जिन्हें आंतरिक रूप से उनकी आधुनिकता के कारण अच्छा मुसलमान नहीं माना जाता है। उन्हें महज मुसलमान होने के कारण कट्टरपंथी कहा जाता है।
मंसूर की फिल्म खुदा के लिए का वर्ष 2007 में पाकिस्तान में प्रदर्शन किया गया था और इस फिल्म ने वहाँ सनसनी फैला दी थी। मंसूर ने कहा कि पाकिस्तान में इस फिल्म को देखने वाले हर दूसरे व्यक्ति का कहना है कि उन लोगों ने 20-30 वर्ष बाद कोई फिल्म देखी है। इस फिल्म को मिली प्रशंसा ने यह साबित कर दिया है कि मैं अपना संदेश लक्ष्य तक पहुँचाने में सफल रहा।
उन्होंने कहा कि इस फिल्म को बनाने का उद्देश्य विश्व में स्वतंत्र रूप से रहने के अधिकार के प्रति मुसलमानों के साथ हो रही नाइंसाफी को प्रदर्शित करना है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में इस फिल्म और उनके निर्देशक के खिलाफ कट्टरपंथियों ने फतवा जारी कर दिया था, लेकिन इसे मुस्लिम समुदाय में अच्छी प्रतिक्रिया मिली। इस फिल्म में कुछ देर के लिए नसीरुद्दीन शाह भी दिखते हैं। इसमें नसीर की छोटी लेकिन सशक्त भूमिका है।
इस फिल्म को हाल ही में पाकिस्तान के सबसे बड़े असैनिक सितारा-ए-इम्तियाज से सम्मानित किया गया था। इसके अतिरिक्त इस फिल्म को 31वें काहिरा अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार मिला था। भारतीय फिल्म वेलकम और रेस का प्रदर्शन पाकिस्तान में किए जाने के बाद अब पाकिस्तान फिल्म खुदा के लिए का भारत में प्रदर्शन किया जा रहा है।
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