दिल्ली उच्च न्यायालय ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के पूर्व जनसंपर्क अधिकारी द्वारा दाखिल याचिका के आधार पर प्रतिष्ठित संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ. पी. वेणुगोपाल को नोटिस जारी किया है। अधिकारी ने कथित रूप से उनका पासपोर्ट तथा चेक बुक समेत अन्य निजी वस्तुएँ कब्जे में रखने को लेकर याचिका दायर की थी। विजय कुमार दास की याचिका पर वेणुगोपाल को नोटिस जारी करते हुए न्यायमूर्ति अनिल कुमार ने उनसे नौ मई तक जवाब माँगा है। याचिका वकील वरुण सिन्हा के जरिये से दायर की गई। दास ने इसके साथ ही फरवरी 2007 में वेणुगोपाल की अध्यक्षता वाले अस्पताल प्रबंधन द्वारा उनका सभी सामान छीने जाने के मामले की भी जाँच कराने की अपील की है। पूर्व में हुई एक घटना के संबंध में दास द्वारा लगाए गए एक अन्य आरोप पर भी अदालत ने वेणुगोपाल के पूर्ववर्ती डॉ. पी. के दवे और प्रबंधन उप निदेशक एन. बिजेन्द्र कुमार को भी नोटिस जारी किया है।
उन पर आरोप है कि उन्होंने अक्टूबर 2002 में विजय कुमार के छुट्टी पर रहने के दौरान कथित रूप से उसका पासपोर्ट, पैन कार्ड, फ्लैट के मालिकाना हक संबंधी दस्तावेज तथा कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा योजना कार्ड अपने कब्जे में ले लिए थे। कब्जाए गए दस्तावेजों की सूची अदालत को सौंपते हुए याचिकाकर्ता ने बताया है कि पिछले वर्ष फरवरी में जब वेणुगोपाल संस्थान के निदेशक थे तो संस्थान परिसर में स्थित कुमार के घर तथा कार्यालय से उसके राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र तथा एलआईसी पालिसी संबंधी दस्तावेज भी जब्त कर लिए गए। अदालत के समक्ष अपने जवाब में एम्स के वकील मुकुल गुप्ता ने स्वीकार किया कि दो अलग-अलग घटनाओं में दास का सामान जब्त किया गया। गुप्ता ने कहा कि संस्थान को अपने दो पूर्व निदेशकों के खिलाफ जाँच कराने में कोई आपत्ति नहीं है। अदालत ने अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए नौ मई की तारीख तय की है।
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