दिल्ली पुलिस में भ्रष्टाचार और अपराध के बारे में पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने कहा है कि दिल्ली पुलिस में ईमानदार अफसर हाशिए पर आ गए हैं और ऐसे लोगों को आगे बढ़ाया जा रहा है जिनका संबंध माफिया तत्वों से है। दिल्ली पुलिस के एसीपी राजबीरसिंह की हत्या पर किरण बेदी ने कहा कि आज लोग भूमि माफिया और पुलिस के बीच गठजोड़ की बात कर रहे हैं। शिकायतें बहुत सारी हैं, अब क्यों निकलकर आ रही हैं। इसे पहले क्यों नहीं रोका गया।
उन्होंने एनकाउंटर स्पेशलिस्ट की अवधारणा को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि आतंकवाद पर नियंत्रण के लिए आतंकवादी बनना जरूरी नहीं है। स्पेशल टास्क आपरेशन में आज अपराधी बनकर आपराधिक जानकारी एकत्र की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी पुलिस हमारे फोर्स में मौजूद है तो यह नेतृत्व की नाकामी है। यहाँ प्रश्न उठता है कि इतने सालों तक ऐसे लोगों को कैसे प्रोन्नति मिली, इनका कैसे इस्तेमाल हुआ और इन्होंने व्यवस्था का कैसे इस्तेमाल किया। इस सबके बीच ईमानदार पुलिस अधिकारी हाशिए पर कैसे चले गए। किरण बेदी ने कहा पुलिस आपराधिक जानकारी एकत्र करते हुए आज खुद अपराधी बन गई है। दिल्ली पुलिस में तो यह बात आम हो गई है।
उन्होंने पूछा कि अपराध पर नियंत्रण का पुलिस का तरीका क्या है, अपराध नियंत्रण की नीति क्या है, यह बात सामने आना चाहिए। पुलिस में आज सुधार की सख्त जरूरत हो गई है। बेदी ने बताया कि पहले स्पेशल सेल स्पेशल कमिश्नर इंटेलिजेंस के पास होता था, लेकिन जब मैं इस पद पर नियुक्त हुई तो कुछ ही समय बाद स्पेशल सेल को इसके दायरे से हटा दिया गया। उन्होंने कहा कि इसलिए कौन क्या कहता है और क्या चाहता है, वह उसके कार्य से साफ दिख जाता है। बॉलीवुड फिल्मों में गलत नहीं दिखाया जाता है।
बेदी ने कहा कि पुलिस में अपराध दर्ज नहीं करने की प्रवृत्ति बन गई है। इसका कारण है कि अगर कोई भी अपराध या एफआईआर दर्ज किया जाता है तो इससे अपराध के आँकड़ों में वृद्धि होती है। इसलिए पुलिस उसे दबाने का हरसंभव प्रयास करती है। उन्होंने कहा इसके लिए पुलिस समय-समय पर विभिन्न कानूनों को अपनी सुविधा के अनुसार तोड़-मरोड़कर पेश करती है। उन्होंने कहा कि गोवा में ब्रिटिश किशोरी स्कारलेट की मौत का ही मामला लें तो उस दौरान मैं बर्लिन में थी और वहाँ स्काई न्यूज पर लगातार इस मामले को दिखाया जा रहा था। अगर समय पर मामला दर्ज कर कार्रवाई की गई होती तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैदा हुई ऐसी स्थिति से बचा जा सकता था।
|