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चीन सबसे बड़ा खतरा-फर्नांडीस
तिब्बत को चीनी भू-भाग के रूप में मान्यता देने के राजग सरकार के फैसले को एक चूक बताते हुए पूर्व रक्षामंत्री जॉर्ज फर्नांडीस ने कहा कि साम्यवादी देश भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा है। उन्होंने चीन को धौंस दिखाने का मौका देने के लिए संप्रग सरकार की भी आलोचना की।

तिब्बत संकट और उस पर भारत की प्रतिक्रिया पर आक्रोश जाहिर करते हुए राजग नेता ने कहा कि ओलिंपिक मशाल को भारत आने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने अपने सहयोगियों और अन्य लोगों से भी कहा कि वे इस मशाल को देश से नहीं गुजरने देने के लिए जो भी हरसंभव प्रयास करें।

अटलबिहारी वाजपेयी सरकार की ओर से तिब्बत को चीन का हिस्सा स्वीकारे जाने के फैसले पर उन्होंने कहा यह गलती नहीं थी बल्कि एक भूल थी। ऐसा नहीं होना चाहिए था। फर्नांडीस इस सरकार में रक्षामंत्री थे।

सीएनएन-आईबीएन पर प्रसारित करण थापर के 'डेविल्स एडवोकेट' कार्यक्रम में फर्नांडीस ने 10 साल पहले दिए गए बयान को याद करते हुए कहा कि चीन अभी भी भारत के लिए संभावित खतरा नंबर एक है और वह दुश्मन बन सकता है।

भारतीय राजदूत ‍निरुपमा राव को पिछले दिनों मध्य रात्रि में चीनी विदेश मंत्रालय की ओर से बुलाए जाने की घटना पर फर्नांडीस ने कहा कि भारत ने इस मुद्दे पर आत्मसमर्पण कर दिया।

फर्नांडीस ने कहा कि हमारी सरकार ने इसकी मंजूरी दी। उन्हें कोई शर्म नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार को अपने राजदूत को अगले दिन तक का इंतजार करने की सलाह देनी चाहिए थी।

गौरतलब है कि ‍निरुपमा राव को यहाँ चीनी दूतावास की सुरक्षा तोड़े जाने के मुद्दे पर अपनी चिंता जताने के लिए चीनी विदेश मंत्रालय ने मध्य रात्रि में तलब किया था। उन्होंने आरोप लगाया भारत को चीन के हाथों बेच दिया गया है। यह पूछे जाने पर कि क्या चीन भारत को धौंस दिखा रहा है, उन्होंने कहा निश्चित रूप से और हमारा देश इसे स्वीकार करता है।

पूर्व रक्षामंत्री ने कहा कि चीन के प्रति भारत का यह रुख 1962 के युद्ध के कारण है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि 1962 में जो हुआ था, वह अभी भी लोगों के जेहन में बना हुआ है और वे इससे बाहर नहीं निकल सकते।

फर्नांडीस ने देश में तिब्बतियों के विरोध प्रदर्शन से निपटने के तरीके को लेकर चीन की ओर से मिली सराहना पर भी एतराज जताया। उन्होंने कहा कि तिब्बत मामले में भारत की प्रतिक्रिया अपर्याप्त थी। उन्होंने कहा कि भारत को इस मामले में और साहस दिखाना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि भारत को बीजिंग में इस साल अगस्त में होने वाले ओलिंपिक खेलों का बहिष्कार करना चाहिए और मशाल को अपने क्षेत्र से गुजरने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।

फर्नांडीस ने कहा कि मैंने अपने सभी सहयोगियों और तिब्बत का समर्थन करने वाले अन्य लोगों से कहा है कि उन्हें चीनी मशाल को यहाँ से गुजरने से रोकना चाहिए। भारत-पाक संबंधों पर पूर्व रक्षामंत्री ने कहा कि 2001 में आगरा शिखर बैठक के मद्देनजर उन्होंने पाकिस्तान के तत्कालीन उच्चायुक्त अशरफ जहाँगीर काजी के साथ कई गुप्त रात्रिभोज मुलाकातें की थीं।

उन्होंने कहा कि इन बैठकों के जरिये भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते सुधारने में मदद मिली। फर्नांडीस ने कहा कि 2002 में संसद पर हमले के बाद तत्कालीन राजग सरकार द्वारा काजी को वापस भेजे का फैसला एक गलती थी।
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