निर्वासित आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने तिब्बत अशांति में अपना हाथ होने के चीन के आरोपों पर पलटवार करते हुए संदेह जताया कि साम्यवादी देश ही हिंसा के पीछे हो सकता है। उन्होंने तिब्बत में शांति बहाली के लिए चीनी अधिकारियों के साथ मिलकर काम करने के लिए स्वयं के तैयार होने की भी बात कही।
तिब्बत मुद्दे के समाधान के लिए बातचीत की पैरवी कर रहे दलाई लामा ने चीन से प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर दुख जताया और घोषणा की कि उनके मध्य मार्ग का भविष्य अगले कुछ सप्ताहों में बीजिंग के रुख पर निर्भर करेगा।
दलाई लामा ने बातचीत की मेज पर चीन को लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद माँगी और कहा कि तिब्बतियों के पास ऐसा करने की कोई शक्ति नहीं है। आध्यात्मिक नेता ने कहा तिब्बती अहिंसावादी लोग हैं। उन्होंने चीन के इन आरोपों को खारिज कर दिया कि वह और उनके समर्थक तिब्बत की हालिया हिंसा के पीछे हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि चीन खुद ही हिंसा के पीछे हो सकता है क्योंकि हमने कुछ चीनी सैनिकों को भिक्षुओं के परिधान प्राप्त करने की बात सुनी है। भिक्षुओं के हिंसा में लिप्त होने के चीन के आरोपों के प्रतिवाद में उन्होंने कहा वे (सैनिक) भिक्षुओं के भेष में हैं। अत: किसी सामान्य आदमी के लिए वे भिक्षु जैसे दिखेंगे, लेकिन उनके पास मौजूद तलवारें तिब्बती नहीं थीं, वे चीनी तलवारें थीं।
राजघाट पर सर्वधर्म प्रार्थना : तिब्बती बौद्धों के धार्मिक गुरु दलाई लामा ने चीन के विरुद्ध प्रदर्शन में मारे गए और घायल हुए लोगों की याद में शनिवार सुबह राजघाट पर आयोजित एक सर्वधर्म प्रार्थना सभा का नेतृत्व किया।
राजघाट पर कड़ी पुलिस सुरक्षा में करीब आठ बजे विभिन्न भागों से आए ईसाई, इस्लाम, सिख, हिंदू और जैन समेत विभिन्न धर्मों के धार्मिक नेताओं के साथ दलाई लामा ने भी सर्वधर्म सभा में भाग लिया।
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