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खनिज नीति के खिलाफ लामबंद 5 राज्य
देश के प्रमुख खनिज उत्पादन राज्यों उड़ीसा, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश एवं राजस्थान ने राष्ट्रीय खनिज नीति 2008 को राष्ट्रविरोधी और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हितों के अनुरूप करार देते हुए शनिवार को केन्द्र को चेतावनी दी कि वे इस जन विरोधी नीति को लागू नहीं होने देंगे।

गौतलब है कि राष्टीय खनिज नीति 2008 का मसौदा कैबिनेट की मंजूरी के बाद गत 20 मार्च को राज्यसभा के पटल पर रखा गया है।

उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमनसिंह, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, झारखंड के जल संसाधन मंत्री कमलेश कुमारसिंह की आज यहाँ हुई बैठक में नई खनिज नीति पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की गई एवं प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह को एक संयुक्त ज्ञापन भेजकर खनिज नीति में बदलाव कर खनिज उत्पादक राज्यों के सुझावों को शामिल करने एवं खनिज निर्यात पर प्रतिबंध की माँग प्रमुखता से उठाने का निर्णय लिया गया।

बैठक के बाद इन नेताओं ने कहा कि नई खनिज नीति में खनिजों का मूल्यवर्धन सम्बद्ध राज्यों में करने रायल्टी वजन आधारित की बजाय मूल्य आधारित करने तथा स्थानीय उदयोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति के बिना निर्यात नहीं करने जैसे महत्वपूर्ण सुझावों को बिल्कुल नहीं माना गया है। उन्होंने कहा कि नई नीति सार्वजनिक क्षेत्र के उदयमों के एकदम विरूद्ध तथा बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हितों के अनुरूप है।

मुख्यमंत्रियों ने एक स्वर से माँग की कि खनिज अयस्कों के निर्यात पर तुरंत रोक लगाई जाए अन्यथा आगामी 40-50 वर्षो में खनिज संपदा समाप्त हो जाएगी। इससे भावी पीढ़ियों को यह संकट झेलना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ऐसा करना देश के विरोध है और भावी पीढ़ियों के प्रति अपराध होगा।

डॉ. रमन सिंह ने कहा कि वह प्रधानमंत्री से फिर माँग करेंगे कि खनिजों पर स्थानीय स्तर पर राज्य को अधिकार दिए जाए। उन्होंने कहा कि देश की जनता अपने हितों के खिलाफ इस खनिज नीति को लागू नहीं होने देगी और राज्य सरकारें भी इसका विरोध करेगी।
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