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कांग्रेस और भाजपा को 'माया' ग्रहण!
यदि लोकसभा के चुनाव आज हो जाएँ तो उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती की अगुवाई वाली बहुजन समाज पार्टी कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी की संभावनाओं पर ग्रहण लगा सकती है।

देश की कई भाषाओं की साप्ताहिक पत्रिका 'द संडे इंडियन' के लिए आईसीएमआर और सी-वोटर द्वारा कराए गए सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है। सर्वेक्षण के मुताबिक यदि आज चुनाव हो जाएँ तो सबसे ज्यादा नुकसान वाम दलों को होगा, जबकि बसपा तीसरे स्थान पर सबसे बड़े समूह के रूमें उभरकर आएगी।

देश का बहुत बड़ा तबका मुद्रास्फीति, लगातार बढ़ती महँगाई और बेलगाम भ्रष्टाचार से बहुत दुखी है। 'देश का मिजाज' शीर्षक के इस सर्वेक्षण के मुताबिक किसानों की ऋण माफी और छठे वेतन आयोग की सिफारिशों का भी मतदाताओं पर कोई असर होने वाला नहीं है।

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन दोनों ही अहम तरीके से नकारात्मक मतदान के शिकार होंगे और लोकसभा में आखिरकार 180 से 190 सीटें तक सिमट कर रह जाएँगे। अपने पक्ष में दो फीसदी वोटों के रुझान के साथ ही लोकसभा में बसपा की सीटें कम से कम 27 से 46 तक जाएगी, जबकि वाममोर्चा की उपस्थिति अहमतरीन तरीके से, वर्तमान लोकसभा की 61 सीटों से घटकर अगली में 42 तक गिर जाएगी।

चुनाव पूर्व यह सर्वेक्षण 200 संसदीय क्षेत्रों के 20000 मतदाताओं के बीच किया गया, अंतिम विश्लेषित नमूने का 74 फीसदी हिस्सा ग्रामीण हिस्सों और 25 फीसदी शहरी इलाकों से लिया गया था। सर्वेक्षण से यह भी पता चलता है कि अगर ठीक इसी समय चुनाव करा दिए जाए तो सप्रंग को 31 फीसदी वोट मिलेंगे, जबकि राजग को महज कुछ ही ज्यादा 32 फीसदी मत हासिल होंगे।

वामदलों का मतों का प्रतिशत 5 फीसदी घटेगा, जबकि बसपा का 6 फीसदी तक बढ़ेगा। चुनाव के बाद बनने वाले तमाम गठबंधनों के आधार पर यह तय दिख पड़ता है कि बसपा इस स्थिति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, वह संप्रग या राजग को बाहर से समर्थन दे सकती है या तीसरे मोर्चे (समाजवादी पार्टी के बिना) के साथ मिलकर केन्द्र में सरकार का गठन भी कर सकती है।

देश की गरीब जनता और मध्यवर्ग का ताजा मिजाज बेहतरीन ढंग से केवल इसी निष्कर्ष से समझा जा सकता है कि इस तबके का 74 फीसदी हिस्सा मानता है कि पिछले एक साल में आम आदमी का जीवन स्तर या तो जस का तस ही रहा है या खराब हुआ है। कम से कम 66 फीसदी सोचते हैं कि अगले एक साल में उनकी हालत या तो ऐसी ही रहेगी या फिर और भी खराब होगी।

साठ फीसदी से अधिक का मानना है कि आवश्यक वस्तुओं के दाम में लगातार वृद्धि आज की सबसे बड़ी समस्या है इस समय के भारत के बारे में पूछे जाने पर प्रतिक्रिया देने वाले लोगों में 35 फीसदी ने कहा कि भारत तो चमक रहा है पर उनकी जिदंगी नहीं, जबकि 21 फीसदी के मुताबिक कुछ भी चमकदार नहीं है। सर्वेक्षण के मुताबिक 41 फीसदी लोग महसूस करते है कि संप्रग सरकार की आर्थिक नीतियाँ आम आदमी के साथ सहानुभूति की नहीं है।
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