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मप्र में तीनों सीटें भाजपा ने जीतीं
मध्यप्रदेश से राज्यसभा की तीनों सीटों पर सत्तारूढ़ भाजपा की जीत के साथ मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने यह बता दिया है कि इस बार पार्टी सिर्फ विजय के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरी थी।

राज्य में पिछले कुछ उपचुनावों में पार्टी की पराजय ने दल के रणनीतिकारों को भी चिंतित कर दिया था। यही वजह रही कि राज्यसभा के चुनाव में नाक का प्रश्न बनी तीसरी सीट पर भूल-चूक की गुंजाइश को पीछे छोड़ते हुए भाजपा ने जीत के लिए पूरी ताकत लगा दी।

विधायक रिश्वत कांड के साए और निर्दलीय कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी विवेक तन्खा की कड़ी चुनौती को देखते हुए पार्टी ने अपनी रणनीतिक तैयारी में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी और आखिरकार उपचुनावों की पराजय को पीछे छोड़ते हुए इस बेहद प्रतिष्ठापूर्ण मुकाबले में जीत हासिल की।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस विजय से न सिर्फ चौहान को संबल मिला, बल्कि केंद्रीय नेतृत्व की दृष्टि में उनका मान और बढ़ा। निर्दलीय कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे विवेक तन्खा के पीछे विपक्ष के एकजुट होने की कोशिशों में भी भाजपा ने सेंध लगा दी।

तन्खा के समर्थन को लेकर कांग्रेस और सपा की नजदीकियाँ बढ़ीं, लेकिन राजनीतिक समीकरणों की दृष्टि से इस पहल की वजह से बसपा और कांग्रेस के बीच दूरियाँ बढ़ गईं।

इसी के चलते बसपा के दोनों विधायकों ने मतदान नहीं किया। इस वर्ष के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों में यह समीकरण भाजपा के लिए अच्छा संकेत है।
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