पायरेसी की वजह से हर साल भारत के मनोरंजन एवं मीडिया उद्योग को 16000 करोड़ रुपए और आठ लाख प्रत्यक्ष नौकरियों का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
यह जानकारी अर्नेस्ट एंड यंग की एक अध्ययन रिपोर्ट में दी गई है, जो उसने अमेरिका, भारत व्यावसायिक परिषद (यूएसआईबीसी) के लिए तैयार की है और गुरुवार को यहाँ फिक्की फ्रेम्स के तीसरे व अंतिम दिन पेश की गई। यूएसआईबीसी के अध्यक्ष रॉन बोमर्स ने कहा कि यह काफी बड़ा नुकसान है और भारत में ऑप्टिकल डिस्क कानून बनना चाहिए, जिससे पायरेसी से निबटा जा सके।
उन्होंने बताया कि अध्ययन में फिल्म, संगीत, टीवी और वीडियो गेम के कारोबार को शामिल किया गया है। फिक्की के महासचिव अमित मित्रा ने कहा कि अध्ययन यह दर्शाता है कि मनोरंजन उद्योग में आए बूम का वास्तविक लाभ उठाना है तो पायरेसी को रोकना होगा।
उन्होंने बताया कि भारतीय मनोरंजन एवं मीडिया उद्योग पिछले चार वर्ष से 18 प्रतिशत के सीएजीआर की दर से बढ़ रहा है और अगर पायरेसी पर अंकुश नहीं लगाया गया तो यह वृद्धि और तेज होगी।
फिल्म 'शोले' के निर्देशक रमेश सिप्पी ने कहा कि बॉलीवुड के विकास के लिए पायरेसी रोकना अपरिहार्य है। इस अवसर पर नेशनल ज्यॉग्राफिक की ओर से तैयार किए गए वृत्तचित्र 'इलीसिट : द डार्क ट्रेड' का भी प्रदर्शन मीडियाकर्मियों के लिए किया गया।
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