भारतीय भाषाई मीडिया निकट भविष्य में और मजबूत होगा, क्योंकि भारतीय समाज का अंग्रेजी के प्रति औपनिवेशिक लगाव कम हो रहा है।
यह राय मीडियाकर्मियों ने मंगलवार को यहाँ मनोरंजन एवं मीडिया के कारोबार पर आयोजित वार्षिक सम्मेलन फिक्की फ्रेम्स में 'भाषाई मीडिया का पुनरोत्थान' विषय पर आयोजित संगोष्ठी में व्यक्त की।
दैनिक जागरण के संपादक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजय गुप्ता ने कहा कि दो दशक पहले तक यहाँ अंग्रेजी मीडिया का पूरा प्रभुत्व था। क्योंकि नीति निर्धारक इसके पक्ष में थे, लेकिन तब से हालात काफी बदल चुके हैं और अब भाषाई मीडिया हर मायने में महत्वपूर्ण होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश का विकास इस तरह से हो रहा है कि महानगरों में विकास रुक-सा गया है, लेकिन छोटे शहर तेजी से बढ़ रहे हैं और इससे भाषाई मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
भारत की एकदिवसीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्रसिंह धोनी का जिक्र करते हुए गुप्ता ने कहा कि सारा देश इस समय 'धोनी प्रभाव' से जकड़ा हुआ है।
मराठी दैनिक लोकसत्ता के संपादक कुमार केतकर ने कहा कि देश की राजनीति में क्षेत्रीय और स्थानीय कारकों का महत्व बढ़ा है और इसी के साथ भाषाई मीडिया की भूमिका का विस्तार हुआ है।
मलयालम दैनिक मातृभूमि के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक वीरेंद्र कुमार ने भी इसी तरह की राय व्यक्त की, जबकि सीएनबीसी आवाज के संपादक संजय पुगलिया ने कहा कि भाषाई मीडिया अगले पाँच वर्षों में पूरी तरह छा जाएगा।
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