मुख्य पृष्ठ > खबर-संसार > समाचार > राष्ट्रीय
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
ई-गवर्नेंस में दिल्ली पहले स्थान पर
डेटाक्वेस्ट-आईडीसी सर्वे-2008
ई-गवर्नेंस के मामले में दिल्ली, गोवा, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु और केरल देश के पाँच सबसे अग्रणी राज्य रहे हैं। डेटाक्वेस्ट-आईडीसी के ई-गवर्नेंस सर्वे में यह बात सामने आई है।

पिछले साल शीर्ष पर रहा कर्नाटक दूसरे स्थान से फिसलकर नौवें स्थान पर और गुजरात चौथे स्थान से फिसलकर 19वें स्थान पर आ गया। इससे साफ होता है कि किसी राज्य में ई-गवर्नेंस से जुड़े कार्यक्रमों की सफलता के लिए राजनीतिक स्थिरता बेहद महत्वपूर्ण है।

डेटाक्वेस्ट-आईडीसी ई-गवर्नेंस सर्वे 2008 के ये नतीजे साइबरमीडिया के प्रमुख प्रकाशन डेटाक्वेस्ट और टेक्नोलॉजी इंटेलिजेंस और रिसर्च के क्षेत्र में भारत की शीर्ष कंपनी आईडीसी इंडिया की ओर से किए गए 20 राज्यों के सर्वेक्षण पर आधारित हैं।

जहाँ दिल्ली पिछले साल के तीसरे स्थान से इस बार पहले स्थान पर आ गई, वहीं पिछले साल का विजेता गोवा एक पायदान फिसलकर इस बार दूसरे स्थान पर रहा। छत्तीसगढ़ 14वें स्थान से चढ़कर तीसरे स्थान पर आ गया और इसकी उछाल सबसे बड़ी रही।

छत्तीसगढ़ के अलावा तीन और राज्यों ने भी इस सूची में अपने क्रम में काफी अच्छा सुधार दिखाया, क्योंकि वहाँ लोगों के लिए सरकारी कामकाज आसान हुआ। हिमाचल प्रदेश नौ पायदान ऊपर चढ़कर सातवें स्थान पर आया, पंजाब आठ सीढ़ियाँ ऊपर चढ़कर 10वें स्थान पर आ गया और राजस्थान भी आठ पायदान ऊपर चढ़ते हुए 11वें स्थान पर रहा।

ई-गवर्नेंस में 2007 के दौरान सबसे बुरी स्थिति झारखंड की रही, इसके बाद गुजरात और हरियाणा का स्थान रहा। इस सूची में गुजरात सबसे ज्यादा फिसला और पिछले साल के चौथे स्थान से इस साल 19वें स्थान पर आ गया। ई-गवर्नेंस में कर्नाटक, उत्तराखंड और हरियाणा के अंकों में भी कमी आई, क्योंकि नागरिकों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों ने सरकारी सेवाओं पर कम संतुष्टि जताई।

आम लोगों की नजर में दिल्ली सबसे आग
दिल्ली के लोग ई-गवर्नेंस के मामले में सबसे ज्यादा संतुष्ट दिखे। इस श्रेणी में कुल 14 पैमानों में से नौ में दिल्ली सबसे ऊपर रही। दूसरे स्थान पर हिमाचल प्रदेश रहा और इसके बाद छत्तीसगढ़, राजस्थान और महाराष्ट्र रहे।

लोगों की संतुष्टि के लिहाज से इस सर्वे में सबसे कमजोर स्थिति झारखंड और उत्तराखंड की रही। नागरिक संतुष्टि के पाँच पैमानों में गुजरात सबसे नीचे रहा, लेकिन इसके आयकर विभाग और बिजली क्षेत्र 20 राज्यों में सर्वश्रेष्ठ रहे।

इस सर्वे के नतीजों पर टिप्पणी करते हुए डेटाक्वेस्ट के मुख्य संपादक प्रशांतो के. रॉय ने कहा कि हमें राजनीतिक और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों का असर लोगों की संतुष्टि पर दिखा है, चाहे वह गुजरात के क्रम में आई बड़ी गिरावट हो या कर्नाटक और पश्चिम बंगाल की कुछ हलकी फिसलन।

आम लोगों ने ई-गवर्नेंस से जुड़ी गतिविधियों में सबसे ज्यादा अंक शिक्षा, आयकर और परिवहन सेवाओं को दिए। रोजगार केंद्र (एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंज), पुलिस और सुरक्षा, और न्यायपालिका वे सबसे ज्यादा असंतुष्ट दिखे। किसी एक श्रेणी में सबसे ज्यादा अंक छत्तीसगढ़ को शिक्षा के क्षेत्र में मिले। सर्वे के मुताबिक पुलिस और सुरक्षा की श्रेणी में दिल्ली सबसे ऊपर रही, जबकि पुलिस और न्यायपालिका दोनों श्रेणियों में गुजरात का बहुत नीचे रहना यह बताता है कि संभवतः यह राज्य अब भी 2002 के दंगों के नकारात्मक असर से उबरा नहीं है।

उद्योग जगत ने तमिलनाडु को माना ई-गवर्नेंस में सबसे आग
ई-गवर्नेंस को लेकर उद्योग जगत की संतुष्टि में तमिलनाडु शिखर पर रहा। छत्तीसगढ़ इससे बहुत पीछे नहीं रहा और इसके बाद दिल्ली, महाराष्ट्र और केरल का स्थान रहा। दिलचस्प बात यह है कि तमिलनाडु 2006 में 10वें स्थान पर था। इसी तरह, छत्तीसगढ़ को उद्योग जगत ने पिछले साल 16वाँ स्थान दिया था।

डेटाक्वेस्ट-आईडीसी सर्वे से पता चलता है कि लगभग तीन-चौथाई राज्यों में ई-गवर्नेंस योजनाओं को लेकर उद्योग जगत की संतुष्टि आम लोगों से ज्यादा है। ऐसा शायद इसलिए है कि उद्योग जगत को आपूर्ति और प्रावधान, सरकारी टेंडर और ठेके, और बिजली बिल भुगतान वगैरह की ऑनलाइन सुविधाओं का फायदा मिला है।

उद्योग जगत की संतुष्टि में पिछले साल सबसे ऊपर रहा कर्नाटक इस साल फिसल कर 11वें स्थान पर आ गया। इसी तरह पिछले साल तीसरे स्थान पर रहा गुजरात इस बार 16वें क्रम पर फिसल गया। दरअसल, इस बार जो पाँच राज्य सबसे ऊपर हैं, उनमें से एक भी पिछले साल शीर्ष पाँच राज्यों में शामिल नहीं था।

छत्तीसगढ़ कुल 17 सेवाओं में से सात सेवाओं में सबसे ऊपर रहा, जैसे आपूर्ति और प्रावधान, सरकारी टेंडर और ठेके, बिक्री क/सेवा कर और वाणिज्य कर, बिजली बिल और पानी बिल। पासपोर्ट सेवाओं की श्रेणी में सबसे ज्यादा अंक हासिल कर असम ने चौंकाया है, जबकि न्यायिक सेवाओं में दिल्ली ने पूरे अंक हासिल किए हैं। उद्योग जगत की संतुष्टि में सबसे नीचे उत्तराखंड (20), मध्यप्रदेश, झारखंड, राजस्थान और गुजरात (16) रहे।

गुजरात के आयकर विभाग ने जहाँ आम लोगों की श्रेणी में सबसे ज्यादा अंक हासिल किए, वहीं उद्योग जगत ने इसे केवल 50 अंक दिए। दिलचस्प बात यह है कि गुजरात अकेला ऐसा राज्य रहा, जिसे ई-गवर्नेंस सेवाओं में आम लोगों और उद्योग जगत, दोनों ने बहुत नीचे माना।

झारखंड को राज्य परिवहन सेवा और रोजगार केंद्र जैसे पैमानों पर सबसे कम अंक मिले। उद्योग जगत की सूची में शीर्ष स्थान पाने वाला तमिलनाडु नागरिक संतुष्टि में 10वें स्थान पर रहा।

गोवा सबसे ज्यादा ई-तत्पर (ई-रेडी) राज्य
इस सर्वे के मुताबिक गोवा सबसे ज्यादा ई-तत्पर (ई-रेडी) राज्य है। इसके बाद दिल्ली और उत्तराखंड आते हैं। ई-रेडी होने का पैमाना यह रखा गया था कि सर्वे में शामिल 20 राज्यों में कहाँ नई ई-गवर्नेंस योजनाएँ ज्यादा सफल हैं।

हालांकि उत्तराखंड उद्योग जगत की संतुष्टि में सबसे पीछे रहा और नागरिकों की संतुष्टि में 19वें स्थान पर रहा, लेकिन ई-रेडी होने के मामले में यह ऊपर से तीसरे स्थान पर आया। इससे संकेत मिलता है कि इस राज्य ने भले ही अपने सामाजिक और शैक्षिक ढांचे को सुधारने के लिए सूचना और संचार तकनीक (आईसीटी) का व्यापक इस्तेमाल शुरू कर दिया हो, लेकिन इसके असली फायदे अभी आम लोगों या उद्योग जगत तक नहीं पहुँचे हैं।

इस सर्वे के परिणाम बताते हैं कि लोगों और उद्योग जगत को ई-गवर्नेंस योजनाओं की प्रगति से संतुष्ट रखने के लिए लगातार और सजग प्रयास जरूरी हैं। पिछले साल अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्य इस साल शिखर पर टिके नहीं रह सके, जिससे साफ है कि सेवाओं की गुणवत्ता को लगातार बनाये रखना और संपर्क में आसानी पर ही ई-गवर्नेंस की सफलता निर्भर है।

आगे कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव और उसके बाद 2009 में देश भर में आम चुनाव होने वाले हैं। इसे देखते हुए ई-गवर्नेंस सेवाओं में बाधा पड़ने की प्रबल संभावना को नकारा नहीं जा सकता।


दिल्ली में पाँच लोगों पर एक कंप्यूटर : दिल्ली में पाँच व्यक्तियों पर एक कंप्यूटर है, जबकि पूरे देश का औसत 50 व्यक्तियों पर एक कंप्यूटर का है। टेलीफोन और इंटरनेट ग्राहकों की संख्या में भी दिल्ली सबसे आगे है। दिल्ली में हर 100 व्यक्तियों पर 88 फोन और हर 100 व्यक्तियों में 84 इंटरनेट ग्राहक हैं।

दिल्ली अपने आईटी ढाँचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) और आम लोगों के काम की आईटी-सुविधाओं पर प्रति व्यक्ति 10,982 रुपये खर्च करती है, जो झारखंड, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की तुलना में लगभग 100 गुना और उड़ीसा की तुलना में लगभग 300 गुना है।

देमेकंप्यूटसबसपहुँझारखंड (प्रति 1000 व्यक्ति केवल 0.4) असम (प्रति 1000 व्यक्ति केवल 0.9) मेहैप्रति 100 व्यक्ति टेलीफोसंख्यछत्तीसगढमेकेवल 3 झारखंमेकेवल 3.4 हैइंटरनेपहुँमेदेतीशीर्राज्दिल्ली, गोवमहाराष्ट्हैंर 1000 व्यक्तियोइंटरनेग्राहकोसंख्यदिल्लमें 84, गोवमें 28 महाराष्ट्में 20 हैर 1000 व्यक्तियोसबसइंटरनेग्राहकोसंख्यझारखंमें 0.9, छत्तीसगढमें 1.2 असमें 1.4 है
और भी
अब बरमूड़ा में दिखेंगे संघ स्वयंसेवक!
परमाणु ऊर्जा देश की जरूरत-मनमोहन
छठे वेतन आयोग की सिफारिशों की मुख्य बातें
'आपातकाल में नहीं मनाने दी गाँधी जयंती'
आरके शर्मा समेत चार को उम्रकैद
कर्मचारियों के वेतन में 40 फीसदी वृद्धि