यदि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यकर्ता परंपरागत खाकी निक्कर के बजाय बरमूड़ा या खाकी हाफ पैंट पहने दिखें तो हैरान मत होइए क्योंकि हिन्दूवादी विचारधारा पर चलने वाला यह संगठन अब समय के साथ बदल रहा है।
आरएसएस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रवक्ता राम माधव ने कहा हमने बदलते समय के अनुसार अपने कड़े गणवेश में शिथिलता दे दी है।
उन्होंने कहा कि यदि कोई आरएसएस कार्यकर्ता बरमूड़ा में अभ्यास करता है तो इसे गणवेश नियम का उल्लंघन नहीं माना जाएगा। शर्त सिर्फ यही है कि यह पैंट नहीं होनी चाहिए क्योंकि यह व्यायाम के लिए सहज पोशाक नहीं हैं।
माधव ने बताया एक और अंतर यह है कि बेंगलुरु जैसे शहर में जहाँ अनेक आरएसएस कार्यकर्ता सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और फैशनेबल कपड़े पहनते हैं वे अपने साथ लैपटॉप ला सकते हैं और अपने कार्यकलापों के बारे में प्रस्तुति दे सकते हैं।
इससे पहले आरएसएस कार्यकर्ताओं की परंपरागत पोशाक काली टोपी, सफेद कमीज और खाकी रंग की निक्कर होती थी।
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