केन्द्रीय कर्मचारियों के वेतनमान ग्रेड भी 35 से घटाकर 20 कर दिए गए हैं। इन 20 ग्रेडों को चार अलग-अलग पे-बैंड पीबी-1, पीबी-2, पीबी-3, पीबी-4 में बाँटा गया है। पे-बैंड के साथ पद के हिसाब से अलग-अलग ग्रेड-पे भी रखी गई है। इससे ऊपर शीर्ष वेतनमान (फिक्स) सचिव के लिए और इससे भी ऊपर एक अलग वेतनमान (फिक्स) केबिनेट सचिव के लिए रखा गया है।
इस तरह नए वेतनमान के हिसाब से सरकारी नौकरी में सबसे निचले पद पर भर्ती के समय पीबी-1 के लिए 4860 रुपए का पे-बैंक वेतन और 1800 रुपए की ग्रेड-पे सहित कुल वेतनमान 6660 रुपए होगा। इसके ऊपर महँगाई और आवास भत्ता अलग से देय होगा और सालाना वेतन वृद्धि भी इसी वेतनमान के हिसाब से तय की जाएगी।
पे-बैंड और उसके साथ लागू पे-ग्रेड को मिलाकर उसका ढाई प्रतिशत सालाना वेतन वृद्धि के रूप में लिया जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी मामलों में सालाना वेतन वृद्धि का समय एक जुलाई होगा। किसी भी स्केल में छह महीने अथवा इससे अधिक रहने वाले कर्मचारी एक जुलाई को सालाना वेतन वृद्धि के योग्य होंगे।
किसी भी श्रेणी के कर्मचारियों की पदोन्नति होने पर उसी पे-बैंड में नए पद के हिसाब से ग्रेड-पे बदल जाएगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी कर्मचारियों को बोनस के बजाय अब उनके कार्यप्रदर्शन के अनुरूप प्रोत्साहन योजना से जोड़ना होगा। अंतत: उत्पादकता से जुड़े बोनस को भी इस योजना से बदलने की सिफारिश की गई है। यह राशि बजट पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं होगी।
वेतन आयोग ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार वर्ष को समय-समय पर बदलने की भी सिफारिश की है। इसमें कहा गया है कि सरकारी कर्मचारियों के महँगाई भत्ते को तय करने के लिए राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग को एक अलग उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) बनाना चाहिए।
आयोग ने कहा है कि उसकी सिफारिशों पर अमल से रक्षा बलों और नागरिक सेवाओं के कर्मचारियों सभी के अधिकतर भत्तों की राशि दोगुनी हो जाएगी। शहरी क्षतिपूर्ति भत्ते (सीसीए) को परिवहन भत्ते में मिला दिए जाने और इसमें चार गुणा वृद्धि की सिफारिश की गई है।
शिक्षा भत्ते की राशि एक बच्चे के लिए वर्तमान 50 रुपए से बढ़ाकर 1000 रुपए मासिक करने की सिफारिश की गई है और यह सुविधा अधिकतम दो बच्चों के लिए ही होगी। हॉस्टल सब्सिडी को भी वर्तमान 300 रुपए से बढ़ाकर 3000 रुपए मासिक करने को कहा गया है। जोखिम भत्ते के स्थान पर जोखिम बीमा की सिफारिश की गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी फिक्स भत्तों को वैसे तो महँगाई वृद्धि से अलग रखा गया है, लेकिन नए वेतनमानों में महँगाई भत्तों के पे-बैंड के 50 प्रतिशत तक पहुँच जाने पर इनकी स्वत: समीक्षा होगी। परिवहन भत्ते में भी महँगाई भत्ते के अनुरूप हर साल वृद्धि होगी।
सरकारी कर्मचारियों के लिए एक नई चिकित्सा बीमा योजना की भी सिफारिश की गई है। इसमें कहा गया है कि यह योजना केन्द्र सरकार के वर्तमान कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए वैकल्पिक होगी, लेकिन नए कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए यह योजना अनिवार्य होगी।
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