गोवा के अंजुना समुद्री तट पर 15 वर्ष की ब्रिटिश किशोरी स्कारलेट कीलिंग की हत्या ने पश्चिमी सभ्यता से ओतप्रोत आधुनिकता की ओर कदम बढ़ाती लड़कियों और बदलते समाज में अभिभावकों के समक्ष उनकी जिम्मेदारी का अहम प्रश्न खड़ा कर दिया है।
स्कारलेट हत्या मामले में लगभग सभी लोगों ने एक स्वर से उसकी माँ फियोना मैकोवेन को अपनी बेटी को अज्ञात स्थान पर अकेले छोड़ने के लिए दोषी ठहराया है।
इस बीच चर्चा इस बात पर भी होती रही कि स्कारलेट 16 वर्ष, 17 वर्ष या 18 वर्ष की है, लेकिन इसने बदलती दुनिया में अभिभावकों की बढ़ती जिम्मेदारी की ओर इशारा तो कर ही दिया है।
तिहाड़ जेल की पूर्व महानिरीक्षक तथा सामाजिक कार्यकर्ता किरण बेदी ने कहा कि आज के समय में लड़कियों का क्लबों और पार्टियों में जाना आम बात है। कई बार तो जरूरत पड़ने पर उन्हें रात को घर से बाहर भी रहना पड़ता है, लेकिन युवावस्था में प्रवेश कर रही इन लड़कियों की एक मित्र एवं मार्गदर्शक के रूप में देखरेख करना माता-पिता का नैतिक दायित्व है।
उन्होंने कहा कि कई बार माता-पिता की अनदेखी की वजह उनका वित्तीय और सामाजिक स्तर और रहन-सहन होता है, लेकिन अन्य जिम्मेदारियों के बीच माँ-बाप को अपने बच्चों का ख्याल तो रखना ही चाहिए।
ज्ञानपीठ से सम्मानित लेखिका इंदिरा गोस्वामी ने कहा कि माँ को युवावस्था में प्रवेश करती अपनी बच्चियों का पथ प्रदर्शक बनना चाहिए और यूँ ही अकेले नहीं छोड़ना चाहिए। इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं कि उस पर अविश्वास किया जा रहा हो, लेकिन किसी अनजान पर तो विश्वास नहीं ही किया जा सकता।
उन्होंने कहा माता-पिता को अपनी जिम्मेदारी का ज्ञान होना चाहिए। इस उम्र में बच्चों को ऐसे ज्ञान की जरूरत है जिसके सहारे वे अच्छे और बुरे के बीच की सूक्ष्म रेखा की पहचान कर सकने में समर्थ हों।
सीबीएसई से जुड़ी एक परामर्शक का मानना है कि एक आम भारतीय माँ तो इस तरह से अपनी बच्ची को नहीं छोड़ सकती, जिस तरह स्कारलेट भटक रही थी, लेकिन यह घटना स्कारलेट की जीवनशैली के समान पश्चिमी सभ्यता और रहन-सहन की नकल करने वाली उस जैसी अनेक भारतीय लड़कियों के लिए एक सबक है, जिन्हें अपनी वास्तविक जिम्मेदारी और अपने अधिकार को मजबूत बनाने वाले कर्त्तव्य का ज्ञान ही नहीं है।
उन्होंने कहा कि यह सही है कि अलग-अलग परिवारों का रहन-सहन अलग होता है, लेकिन स्कारलेट के रहन-सहन से स्पष्ट होता है कि उसकी माँ को तो उसके व्यवहार पर कोई आपत्ति नहीं थी। उन्होंने कहा कि माता-पिता की इस गलती की सजा स्कारलेट को चुकाना पड़ी।
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