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सलाखों के पीछे मुस्कराता बचपन
उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है। उनका कसूर यह है कि े उन माताओं की अबोध संतानें हैं, जो अपने जुर्मों की सजा काट रही हैं, इसीलिए उनका बचपन माताओं के साथ सलाखों के पीछे गुजर रहा है। लेकिन इससे बेखबर ये बच्चे हँसते-खेलते अपना बचपन व्यतीत कर रहे हैं।

एशिया की सबसे बड़ी जेल समझी जाने वाली 'तिहाड़ जेल' में सजा काट रही करीब 525 महिलाओं में से कुछ के साथ उनके बच्चे भी हैं। संविधान के अनुसार करीब पाँच साल तक की उम्र के इन बच्चों को माँ के साथ रहने की अनुमति है। जेल में बंद माताओं के साथ रह रहे इन बच्चों की संख्या करीब 45 है।

तिहाड़ जेल के विधि अधिकारी सुनील गुप्ता ने बताया कि जेल में इन बच्चों की देखभाल और प्राथमिक शिक्षा की पूरी व्यवस्था की जाती है। इन बच्चों को ऐसा माहौल मुहैया कराने का प्रयास किया जाता है कि उनका शारीरिक एवं मानसिक विकास बाधित न हो।

उन्होंने बताया कि जेल में महिला कैदियों को काम करना पड़ता है। ऐसे में उनके बच्चों की देखभाल के लिए शिशु गृह है। जेल में एक नर्सरी भी है। कुछ गैर सरकारी संगठनों के सदस्य इस शिशु गृह और नर्सरी में बच्चों की देखभाल करते हैं। समय-समय पर इन बच्चों के स्वास्थ्य की जाँच जेल प्रशासन द्वारा कराई जाती है।

क्या जेल के माहौल में बच्चों का सामान्य मानसिक विकास संभव है? गुप्ता ने कहा कि जेल प्रशासन अपनी ओर से पूरी कोशिश करता है कि इन बच्चों को सामान्य माहौल मिले। किसी भी बच्चे के लिए माँ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

अपराध करने के बाद अकसर व्यक्ति की मानसिकता में थोड़ा-बहुत परिवर्तन आ जाता है, लेकिन जिस महिला का बच्चा उसके साथ होता है, उसको अपनी सजा को लेकर कठिनाई का अहसास अधिक नहीं होता। साथ ही वह इस चिंता से भी मुक्त रहती है कि उसके बच्चे की देखभाल ठीक से हो रही है या नहीं, क्योंकि बच्चा उसकी आँखों के सामने होता है।

गुप्ता ने बताया कि जेल में समय-समय पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। दीवाली, दशहरा, होली, ईद, क्रिसमस आदि त्योहारों पर बड़े आयोजन किए जाते हैं। इन आयोजनों की वजह से दिनचर्या में कुछ परिवर्तन हो जाता है और बच्चों को भी मजा आता है।

जेल में बंद महिलाओं के साथ रह रहे बच्चों के मानसिक विकास के बारे में पूछने पर मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. समीर पारेख ने बताया कि चार या पाँच साल की उम्र इतनी अधिक नहीं होती कि इसमें सामाजिक माहौल का गहरा असर पड़े, लेकिन इस उम्र में बच्चों को माँ की जरूरत सर्वाधिक होती है।

उन्होंने बताया कि चार या पाँच साल के बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए उनकी माँ का उनके साथ रहना जरूरी होता है। अगर इस उम्र में बच्चों को माँ से अलग रखा जाए तो बच्चों पर भावनात्मक दबाव पड़ सकता है और उनका मानसिक विकास भी प्रभावित होता है।
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