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'लाइसेंस देखने की जिम्मेदारी मालिक की'
उच्चतम न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि मोटर वाहन चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी वाहन मालिक की है। न्यायमूर्ति एसबी सिन्हा और न्यायूर्ति वी.एस. सिरपुरकर की पीठ ने कहा है कि वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं होने पर बीमा कंपनी थर्ड पार्टी दावे का भुगतान करने को बाध्य नहीं होगी।

उच्चतम न्यायालय ने सड़क हादसे में मौत का शिकार हुए जयगुरु के परिवार के सदस्यों की अपील खारिज करते हुए कहा कि वाहन मालिक ने जिस व्यक्ति को वाहन चलाने के लिए अधिकृत किया है उसके पास वैध लाइसेंस है या नहीं यह देखना उसका वैधानिक दायित्व है।

तांगा चालक जयगुरु की ट्रैक्टर की टक्कर से मौत हो गई थी। ट्रैक्टर सुशील कुमार नामक व्यक्ति चला रहा था। मृतक के परिजन ने क्षतिपूर्ति का दावा किया जिसे मोटर वाहन दुर्घटना दावा पंचाट ने इस बुनियाद पर खारिज कर दिया कि बीमा कंपनी क्षतिपूर्ति के लिए बाध्य नहीं है, क्योंकि चालक के पास वैध लाइसेंस नहीं था।

पीड़ित परिवार ने उच्च न्यायालय में अपील की जिसने उसे इस आधार पर खारिज कर दिया कि क्षतिपूर्ति देने की बाध्यता मोटर वाहन मालिक और चालक की होती है न कि बीमा कंपनी की। इस पर पीड़ित परिवार ने शीर्ष अदालत में विशेष अनुमति याचिका दायर की।

शीर्ष अदालत ने अपनी कई पुरानी व्यवस्थाओं का जिक्र करते हुए कहा कि जाली या बीती अवधि वाले लाइसेंस के मामले में फर्क किया जा सकता है, लेकिन इस मामले में चालक के पास कोई लाइसेंस नहीं था ऐसे में बीमा कंपनी को दावे की क्षतिपूर्ति करने को नहीं कहा जा सकता।

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि अगर वाहन मालिक किसी ऐसे व्यक्ति को वाहन चलाने देता है, जिसके पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है तो उस वाहन से दुघर्टना होने की स्थिति में बीमा कंपनी पर थर्ड पार्टी दावा भुगतान करने की बाध्यता नहीं होगी।
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