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हिन्दुस्तान में बीमा जायज-फतवा
इस्लाम में बीमा हराम होने के बावजूद देश में समय-समय पर होने वाले साम्प्रदायिक दंगों में मुसलमानों की जान माल के खतरे को देखते हुए भारत के प्रमुख इस्लामी संगठनों और मदरसों ने उन्हें अपना, अपनी संपत्ति तथा कारोबार का बीमा कराने की अनुमति दे दी है।

मुसलमानों की ज्वलंत समस्याओं पर फैसले देने वाली भारत की प्रमुख इस्लामी संस्था भारतीय इस्लामी फिकह अकादमी ने बीमा के बारे में कहा कि शरिया में बीमा की अनुमति नहीं है, लेकिन भारत की वर्तमान परिस्थति में अक्सर होने वाले साम्प्रदायिक दंगो के कारण मुसलमानों के जान माल व्यापार और वाणिज्य आदि को सदैव बड़ा खतरा बना रहता है।

फैसले में कहा गया कि इस्लाम में बीमा हराम होने के बावजूद विशेष परिस्थितियों में शरिया के ही प्रावधान मुसलमानों को जानो-माल की रक्षा के लिए बीमा जैसे एहतियाती कदम उठाने की वैधानिक अनुमति देते हैं। इसमें कहा गया कि ऐसे हालात में शरिया के विशेष प्रावधान के तहत जान-माल की हिफाजत के लिए एहतियाती तौर पर परित्यक्त और प्रतिबंधित बातों को अपनाया जा सकता है।

शरिया के इस विशेष प्रावधान के तहत ही अकादमी ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि हराम होने के बावजूद भारत में मुसलमानों को बीमा कराने की खास छूट दी जाती है।

अकादमी के चौदहवें सम्मेलन में यह अहम फैसला करने में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड दारूल उलूम देवबंद जमाते इस्लामी और देश भर के 300 से अधिक मदरसों के उलेमा और विशेषज्ञ शामिल हैं।
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