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वैज्ञानिकों का रिटायरमेंट अब 65 वर्ष में
पाँच हजार किलोमीटर तक की मारक क्षमता वाली अग्नि मिसाइल समुद्र के भीतर मार करने वाली मिसाइलों और एंटी मिसाइल प्रणाली जैसी सामरिक महत्व की परियोजनाओं में शामिल प्रमुख वैज्ञानिकों की सेवाएँ बरकरार रखने के लिए रक्षा मंत्रालय ने डीआरडीओ के चुनिंदा वैज्ञानिकों की सेवा आयु सीमा बढ़ाकर 65 वर्ष करने का प्रस्ताव रखा है।

छठे वेतन आयोग की ओर से कथित तौर पर स्वीकृत प्रस्ताव से उन वैज्ञानिकों को भी लाभ होगा जो एडवांस्ड कंपोजिट्स मेटलरजिस्ट और अन्य परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं।

यह लाभ केवल चुनिंदा वैज्ञानिकों तक ही सीमित नहीं है, क्योंकि रक्षा मंत्रालय ने सामान्य तौर पर डीआरडीओ के सभी वैज्ञानिकों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा बढ़ाकर 62 वर्ष करने का प्रस्ताव रखा है।

रक्षा मंत्रालय की ओर से तैयार इन प्रस्तावों को एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कालेज आफ इंडिया (एएससीआई) ने हरी झंडी दे दी है और सूत्रों के मुताबिक इसे छठे वेतन आयोग ने भी अपनी मंजूरी दे दी है।

वास्तव में डीआरडीओ कर्मियों के लिए यह नया प्रोत्साहन पैकेज औपचारिक तौर पर पिछले साल ही लागू किया जाने वाला था। लेकिन रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी ने इस प्रस्ताव पर नए वेतन आयोग के मुहर का सुझाव दिया था।

संसद में पेश आधिकारिक आँकड़ों के मुताबिक डीआरडीओ ने पिछले कुछ वर्षों में। 404 वैज्ञानिक खोए हैं और हर साल विभाग छह से सात फीसदी की दर से वैज्ञानिकों की संख्या घट रही है।

अग्नि मिसाइलों की मारक क्षमता बढ़ाने और समुद्र के भीतर मार करने वाली मिसाइल के विकास जैसी परियोजनाओं के मुख्य चरणों पर पहुँचने के मद्देनजर वैज्ञानिकों की सेवानिवृत्ति आयु सीमा बढ़ाने का सरकार का कदम काफी महत्वपूर्ण है।

डीआरडीओ के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया इन परियोजनाओं के लिए अगला दो से तीन साल काफी अहम हैं। उन्होंने कहा कि इस अवधि में कई अन्य प्रमुख परियोजनाएँ परिणाम देना शुरू कर देंगी।

उन्होंने कहा कि हम इन प्रणालियों में लगे प्रमुख कर्मचारियों को खोकर नुकसान नहीं उठा सकते है। डीआरडीओ कर्मचारियों के लिए वेतन आयोग के लाभ के पिटारे में बंद अन्य प्रोत्साहनों में नए मूल वेतनमान का तीस फीसदी उन्हें विशेष बौद्धिक संपदा के रूप में मिलेगा। इसके अलावा प्रोफेशनल अपडेट अलाउंस सालाना पाँच हजार रुपए से बढ़ाकर 25 हजार रुपए कर दिया जाएगा।

इसके अलावा नए भर्ती कर्मचारियों को प्रारंभिक चयन के आधार पर तीन वेतनवृद्धि प्राप्त हो जाएगी और इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर या विज्ञान विषय में पीएचडी कर चुके कर्मचारियों को प्रति माह एक हजार रुपए उच्च शिक्षा भत्ता के तौर पर मिलेगा।
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