मुख्य पृष्ठ > खबर-संसार > समाचार > राष्ट्रीय
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
रिहाई से अनजान थे आडवाणी
कंधार कांड मामले पर आडवाणी का खुलासा
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने पहली बार स्पष्ट रूप से स्वीकारा है कि 1999 के कंधार विमान अपहरण कांड के समय यात्रियों के बदले जम्मू-कश्मीर के तीन खूँखार आतंकवादियों को छोड़ने के फैसले की उन्हें जानकारी नहीं थी।

एक निजी चैनल के साथ कल साक्षात्कार में आडवाणी ने अपनी नई पुस्तक 'माई कंट्री माई लाईफ' पर चर्चा करते हुए कहा कि यात्रियों की सुरक्षित वापसी के लिए जेल में बंद आतंकवादियों को छोड़ने के विचार से वह कतई खुश नहीं थे। उन्होंने कहा कि सर्वदलीय बैठक में किसी ने भी इस रिहाई का विरोध नहीं किया क्योंकि सबसे बड़ा मुद्दा यात्रियों को सुरक्षित देश वापस लाना था।

उन्होंने कहा कि आतंकवादियों ने उनकी शर्त नहीं माने जाने पर विमान को बम विस्फोट से उड़ा देने की धमकी दे रखी थी। इस बात की चर्चा आडवाणी ने अपनी पुस्तक में भी की है।

जब उनसे पूछा गया कि आतंकवादियों की रिहाई का फैसला किसका था तो उन्होंने इसे टालते हुए कहा कि यह सवाल श्री जसवंतसिंह से पूछा जाना चाहिए। जब उनसे पूछा गया कि तत्कालीन विदेशमंत्री सिंह का एक ही विमान में आतंकवादियों के साथ जाने देने का फैसला किसका था तो उनका जबाव था कि उस समय सिंह का आतंकवादियों के साथ जाना कोई मुद्दा ही नहीं था बल्कि बंधक बनाए गए लोगों की सुरक्षित वापसी ही अहम सवाल था और इस संबंध में सिंह ने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी से जरूर ही परामर्श किया होगा।

जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख समेत तीन खूँखार आतंकवादियों की रिहाई के फैसले से अपने आप को दूर रखते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें पता था कि इस रिहाई से भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के भीतर गहरा असंतोष पैदा हो सकता था।
और भी
अग्नि-1 का सफल प्रक्षेपण
आडवाणी ने सोनिया के साथ होली मनाई
देश त्योहार के 'रंग' में सराबोर
तिब्बत में संघर्ष जारी रहेगा-दलाई लामा
वाजेपयी, आडवाणी ने मनाई होली
हाथियों की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि