अफ्रीका महाद्वीप के साथ मिलजुल कर काम करने के लिए भारत की वचनबद्धता दोहराते हुए विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी ने आतंकवाद से लड़ने और संयुक्त राष्ट्र में सुधारों के लिए अफ्रीकी देशों के साथ ज्यादा निकट सहयोग पर शुक्रवार को जोर दिया।
आतंकवाद को सभ्य संसार के लिए गंभीर खतरा बताते हुए मुखर्जी ने कहा कि भारत इस बुराई से लड़ने के लिए अफ्रीकी देशों के साथ द्विपक्षीय और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने के लिए उत्सुक है। उन्होंने कहा कि भारत का मानना है कि हर तरह की आतंकवादी हिंसा को पूरी तरह खारिज कर तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाकर ही इस बुराई को खत्म किया जा सकता है। उन्होंने इस सिलसिले में अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक समझौता संपन्न होने को महत्वपूर्ण बताया।
विदेशमंत्री भारत और अफ्रीकी देशों के बीच व्यावसायिक सहयोग बढ़ाने तथा अफ्रीका में भारतीय उद्यमियों के लिए निवेश के नए मौके तलाशने के बारे में तीन दिन के सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इसका आयोजन भारतीय उद्योग परिसंघ और एक्जिम बैंक ने विदेश मंत्रालय के सहयोग से किया।
मुखर्जी ने संयुक्त राष्ट्र में सुधारों को भारतीय एजेंडा का मुख्य बिन्दु बताते हुए विश्व संस्था में आमूल सुधारों के लिए अफ्रीकी देशों का समर्थन माँगा। उन्होंने कहा कि भारत चाहता है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थाई और गैर स्थाई सदस्यता का विस्तार कर इस संस्था को सही अर्थों में लोकतांत्रिक चरित्र दिया जाए।
भारत और अफ्रीका के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2001-02 के 5 अरब डॉलर से पाँच गुना बढ़कर 2006-07 में 25 अरब डॉलर हो जाने की चर्चा करते हुए विदेशमंत्री ने कहा कि इसके अभी भी अपनी वास्तविक क्षमता तक पहुँचने की काफी गुंजाइश है।
उन्होंने इस सिलसिले में कहा कि भारत और पूर्वी एवं दक्षिणी अफ्रीका के साझे बाजार ने व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर की संभावना तलाशने के लिए एक संयुक्त कार्य दल गठित किया है तथा दक्षिण अफ्रीकी कस्टम्स यूनियन के साथ वरीयता व्यापार समझौते के लिए बातचीत चल रही है।
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