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सरबजीतसिंह के बदले सौदा नहीं होगा
किसी भी पाक कैदी को नहीं छोड़ा जाएगा
भारत ने आज सरबजीतसिंह के बदले में किसी पाकिस्तानी कैदी को रिहा करने से इनकार किया। पाकिस्तान ने कल सरबजीत की फाँसी पर 30 दिन के लिए रोक लगाने की घोषणा की थी। इससे इस बात का संकेत मिला है कि उसकी किस्मत का फैसला करने का अधिकार देश में जल्द ही बनने वाली नई सरकार पर छोड़ दिया गया है।

यह पूछे जाने पर कि क्या कैदियों के आदान-प्रदान के लिए कोई कदम उठाया जा रहा है, तो इस पर गृह राज्यमंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने कहा कि हमने पाकिस्तान सरकार से अपील की है और उम्मीद है कि पाकिस्तान हमारी अपील को सुनेगा। बदले में किसी भी व्यक्ति को नहीं छोड़ा जाएगा।

जायसवाल ने हालाँकि कहा कि अगर कोई पाकिस्तानी कैदी कानूनी तरीके से छोड़ा जाता है तो ऐसा किया जाएगा। उच्चायोग ने वक्तव्य में उम्मीद जताई कि सरबजीत को मानवीय आधार पर क्षमादान मिल जाएगा।

गौरतलब है कि पाकिस्तानी प्रशासन के सूत्रों ने इस्लामाबाद में कहा कि सरबजीत के मामले से संबंधित अधिकारियों ने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेतृत्व में नई सरकार के गठन तक इस मामले को रोककर रखने का फैसला किया है।

इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग द्वारा जारी वक्तव्य में कहा गया कि इस राहत से रहम की अपील पर सभी कोणों से उचित तरीके से विचार करने का वक्त मिल गया है। वक्तव्य में कहा गया कि भारत सरकार को उम्मीद है कि सरबजीतसिंह को मानवीय आधार पर क्षमादान दिया जाएगा।

पाकिस्तान की मानवाधिकार कार्यकर्ता अस्माँ जहाँगीर ने भी सरबजीत को बचाने की मुहिम का समर्थन करते हुए कहा कि उन्हें क्षमादान द‍िया जाना चाहिए। उन्होंने दिल्ली में कहा कि मैं सरबजीत की जान बख्शने की अपील करती हूँ।

उच्चायोग ने वक्तव्य में उम्मीद जताई कि सरबजीत को मानवीय आधार पर क्षमादान मिल जाएगा। गौरतलब है कि राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने सरबजीत को एक अप्रैल को दी जाने वाली फाँसी एक महीने के लिए टालने का कल फैसला किया था।

वक्तव्य में कहा गया है कि भारत सरकार यह जानकर खुश है कि सरबजीतसिंह की फाँसी पर रोक लगा दी गई है। इसमें कहा गया कि इस खबर का कल भारतीय संसद में स्वागत किया गया। सरबजीत के परिवार ने भी इस मामले में मिले समर्थन के लिए सबके प्रति आभार प्रकट किया।

सरबजीत को क्षमादान का समर्थन करते हुए अस्माँ जहाँगीर ने कैदियों के जीवन को लेकर राजनीति करने के लिए पाकिस्तान और भारत दोनों को आड़े हाथ लिया।

अस्माँ ने नई दिल्ली में एक सम्मेलन में कहा कि भारत और पाकिस्तान को कैदियों के जीवन पर राजनीति नहीं करना चाहिए। उनकी जान बख्श दी जानी चाहिए। अस्माँ ने कहा कि मैं अपील करती हूँ कि सरबजीत की जान बख्श दी जाए। उसे अपने मुल्क भेजा जाना चाहिए। चाहे ऐसा आजीवन कारावास की सजा काटने के बाद ही हो।

सरबजीत की पुत्री स्वपनदीप कौर ने चंडीगढ़ में कहा कि ऐसा लगता है कि पाकिस्तान उसके पिता के मामले में अपने रुख में नरमी लाया है।

पाकिस्तान सरकार के फैसले से संतुष्ट स्वपनदीप ने कहा कि हमने (परिवार ने) वीजा के लिए आवेदन किया है और अगर वे हमें पाकिस्तान जाने की अनुमति देते हैं तो हम उनके निर्दोष होने का सबूत पेश करेंगे।

यह पूछे जाने पर कि क्या वह अपने पिता की रिहाई के बदले में किसी आतंकवादी को सरकार द्वारा रिहा किया जाना चाहेगी तो उसने कहा यह सरकार का नीतिगत मामला है और केंद्र को इस तरह के मुद्दों पर फैसला करना है।
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