लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा है कि अगर अयोध्या में विवादित ढाँचा नहीं ढहाया जाता तो अयोध्या आंदोलन अपनी मंजिल तक पहुँच जाता, जिससे न केवल हिंदुओं की माँग पूरी होती, बल्कि सांप्रदायिक सद्भाव को भी बढ़ावा मिलता। आडवाणी ने अयोध्या में विवादित ढाँचा ढहाए जाने के दिन को अपने जीवन का सबसे दु:खद दिन बताते हुए अपनी आत्मकथा 'माई कंट्री माई लाइफ' में कहा है कि छह दिसंबर को 'बाबरी ढाँचे' को ढहाया जाना अत्यंत खेदजनक था।
आडवाणी के मुताबिक भारत का भविष्य बहुत कुछ इस आंदोलन के नतीजे पर निर्भर करेगा। आडवाणी की आत्मकथा का पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने बुधवार को यहाँ विमोचन किया। पाँच खंडों में लिखी गई 1040 पृष्ठ की आत्मकथा लिखने पर संतोष व्यक्त करते हुए आडवाणी ने कहा कि उन्हें जीवन में खुशियाँ और जीवन की सार्थकता की बराबर अनुभूति हुई है, जो सामान्यतः एक व्यक्ति को साथ-साथ नहीं मिलती। इस मौके पर डॉ. कलाम ने आडवाणी की तारीफ के पुल बाँधते हुए कहा कि आडवाणी में एक दूरदर्शी नेता के सारे गुण विद्यमान हैं। उन्होंने कहा कि आडवाणी की आत्मकथा आजाद भारत के इतिहास की गहन विवेचना है।
पैदल पहुँचे कलाम : पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम बुधवार को दिल्ली के ट्रैफिक में फँस जाने के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी की आत्मकथा का विमोचन करने के लिए पैदल ही आयोजन स्थल रवाना हो गए।
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