लालकृष्ण आडवाणी तथा राजग के कई वरिष्ठ मंत्रियों ने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी के प्रधान सलाहकार और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ब्रजेश मिश्रा के दोनों पदों को अलग-अलग करने की बात कही थी, लेकिन वाजपेयी ने इसे खारिज कर दिया था।
राजग द्वारा गठित करगिल समीक्षा समिति ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पद को पूर्णकालीक बनाने की सिफारिश की थी। यह बात आडवाणी ने अपनी पुस्तक 'माई कंट्री माई लाइफ' में कही है। आज एक समारोह में आडवाणी की 986 पन्नों की पुस्तक का विमोचन पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम ने किया।
उन्होंने ने अपनी राय जाहिर करते हुए कहा कि इस तरह की दो महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के लिए काफी सजग रहने की जरूरत होती है और इन्हें एक साथ मिला देने से उच्च स्तर पर सरकार में सामंजस्य को नहीं बढ़ाया जा सकता है। गौरतलब है कि यह पहली बार है कि आडवाणी ने प्रत्यक्ष तौर पर वाजपेयी के साथ ब्रजेश मिश्रा के सवाल पर मतभेदों की बात स्वीकार की है।
मनमोहन पर निशाना साधा : आडवाणी ने अपनी पुस्तक में प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह और उस समय राज्यसभा में विपक्ष के नेता की कारगिल संघर्ष से निपटने के लिए राजग सरकार की आलोचना के लिए उन्हें आड़े हाथों लिया।
उन्होंने कांग्रेस पार्टी से पूछा कि वह राष्ट्र को बताए कि इंदिरा गाँधी ने वर्ष 1971 में भारत की निर्णायक विजय के बाद भी कश्मीर समस्या का अंतिम समाधान क्यों नहीं निकाला और वह भी उस समय जब भारत की जेल में पाकिस्तान के 93 हजार युद्धबंदी थे। आडवाणी ने अपनी पुस्तक में कश्मीर समस्या से निपटने के जवाहरलाल नेहरू के तौरतरीकों की भी आलोचना की।
पैदल चलकर पहुँचे कलाम : आडवाणी की आत्मकथा के विमोचन के लिए आज पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम पैदल ही आयोजन स्थल पर पहुँच गए। खेलगाँव मार्ग स्थित सीरी फोर्ट सभागृह में आडवाणी की किताब के विमोचन का समारोह शाम को था। मुख्य अतिथि डॉ. कलाम तय समय के आसपास आयोजन स्थल पर नहीं पहुँच पाए, क्योंकि वह जाम में फँस गए थे।
शाम करीब 6.35 बजे उद्घोषिका ने लोगों को बताया पूर्व राष्ट्रपति कलाम पैदल ही तशरीफ ला रहे हैं। इस घोषणा के साथ ही सभागार करतल ध्वनि से गूँज उठा।
आडवाणी ने समारोह को कलाम से पहले ही संबोधित करते हुए कहा कि निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पहले कलाम को संबोधित करना था और मुझे बाद में बोलना था, लेकिन यह सही नहीं होगा। शिष्टाचार यही कहता है कि मुख्य अतिथि होने के नाते पूर्व राष्ट्रपति को ही मेरे बाद समारोह को संबोधित करना चाहिए।
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