वाम और विपक्षी दलों के तीखे विरोध का सामना कर रही सरकार ने बुधवार को कहा कि वह न तो भारत-अमेरिकी परमाणु करार को दुरुस्त कर सकती है और न ही इसे खारिज कर सकती है। विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी ने राज्यसभा में विदेश नीति से जुड़े घटनाक्रमों पर हुए चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि हम ऐसी स्थिति में आ गए हैं, जहाँ हम न तो इसे दुरुस्त कर सकते हैं और न ही इसे खारिज कर सकते हैं। हम अभी बातचीत के दौर से गुजर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आईएईए के साथ भारत आधारित सुरक्षा मानकों की वार्ता में कुछ प्रगति हुई है, लेकिन इस मामले में सहमति को लिखित रूप नहीं दिया गया है।
करार पर संयुक्त संसदीय समिति बनाने की भाजपा की माँग को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि प्रकिया पूरी होने पर हम संसद में आकर उसकी राय जानेंगे। कृपया उस स्थिति को आने तो दीजिए।
उन्होंने कहा कि इससे पहले देश में कभी किसी अंतरराष्ट्रीय समझौते की संसद में समीक्षा नहीं हुई है। चर्चा में वाम और भाजपा सदस्यों ने इस बात पर चिंता जताई थी कि सरकार संसद की आपत्तियों के बावजूद इस करार के बारे में बातचीत को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का महत्व घटा रही है।
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