आपातकाल के दौरान जेलों में बंद नेता भी हँसी-मजाक का कोई मौका नहीं चूकते थे। लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने अपनी पुस्तक 'माई कंट्री माई लाइफ' में ऐसी ही एक घटना का जिक्र किया है। आडवाणी ने कहा- जब वे अन्य नेताओं के साथ जेल में कैद थे तो उन्हें संविधान के 40वें संशोधन विधेयक और चुनाव कानून में संशोधन का पता चला। इन संशोधनों के द्वारा पिछली तिथि से तत्कालीन प्रधानमंत्री के चुनाव को चुनौती नहीं दे सकने तथा उन्हें भ्रष्ट आचरण से मुक्त रखने संबंधी प्रावधान थे। उन्होंने कहा कि जेल में चर्चा चली कि जब चुनाव कानून में संशोधन करके ही इंदिरा गाँधी के चुनाव को वैध ठहराया जा सकता है तो संविधान में संशोधन की क्या आवश्यकता थी। इस पर डॉ. भाई महावीर ने एक दिलचस्प किस्सा सुनाया। भाई महावीर ने कहा कि पश्चिम देशों में सास किस तरह से हास्य का विषय बनती है, उसका पता इस बात से चलता है कि जब एक व्यक्ति को तार मिला कि उसकी सास अचानक मर गई है और उसका अंतिम संस्कार दफनाकर किया जाए अथवा जलाकर। इस पर दामाद ने तुरंत जवाब भेजा कोई जोखिम मत लो दोनों काम करो।
भाई महावीर ने कहा कि सम्भवतया तत्कालीन विधि मंत्री एचआर गोखले भी कानून के मामले में कोई जोखिम नहीं लेना चाहते थे।
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