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शिवानी हत्याकांड में आरके शर्मा दोषी
तीन और दोषी, दो सबूत के अभाव में बरी
बहुचर्चित शिवानी भटनागर हत्याकांड में यहाँ की एक अदालत ने निलंबित पुलिस महानिरीक्षक रविकांत शर्मा समेत चार लोगों को दोषी ठहराया। अदालत ने नौ साल पुराने इस सनसनीखेज मामले में शर्मा को मुख्य षड्यंत्रकारी बताया है।

अपने 110 पन्नों के फैसले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजेंद्र कुमार शास्त्री ने कहा कि टेलीफोन कॉल के रिकॉर्ड समेत अनेक ठोस सबूत हैं, जो साबित करते हैं कि हरियाणा कैडर के आईपीएस अधिकारी 54 वर्षीय शर्मा मुख्य षड्यंत्रकारी और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) में क्लर्क रह चुका सह-अभियुक्त प्रदीप शर्मा उनका हत्यारा था।

शर्मा और जिन तीन अन्य लोगों को दोषी ठहराया गया है, उन्हें सजा-ए-मौत या आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा सकती है। दोषियों को कितनी सजा होगी इसकी घोषणा 20 मार्च को की जा सकती है।

सनखनीखेज मामले की सुनवाई के दौरान शर्मा की पत्नी मधु ने आरोप लगाया कि इस हत्याकांड में दिवंगत भाजपा नेता प्रमोद महाजन का हाथ था। इस आरोप का उन्होंने जोरदार खंडन किया था।

अदालत ने अभियोजन पक्ष की उन दलीलों को मानने से इनकार कर दिया, जिसमें कहा गया था कि शर्मा ने शिवानी की हत्या की साजिश इसलिए रची क्योंकि उसने धमकी दी थी कि वह इस बात का खुलासा कर देगी कि पीएमओ में अपनी पदस्थापना के दौरान शर्मा ने उन्हें कुछ गोपनीय दस्तावेज लीक किए थे।

अदालत ने अभियोजन पक्ष की उन दलीलों को स्वीकार किया कि शर्मा के साथ शिवानी के अंतरंग संबंध थे। 1998 में जब शर्मा ने शिवानी को नजरंदाज करना शुरू किया तो उसने उसे बेनकाब करने की धमकी दी।

तीन अन्य सह-अभियुक्तों भगवान शर्मा, प्रदीप शर्मा और सत्यप्रकाश को भी 302 (हत्या) और 120-बी (आपराधिक साजिश) का दोषी ठहराया। सबूतों के अभाव में वेदप्रकाश शर्मा और वेदप्रकाश उर्फ कालू को बरी कर दिया गया।

खचाखच भरी अदालत में जब न्यायाधीश ने आदेश जारी किया तब गुलाबी टी-शर्ट और भूरे रंग की पैंट पहने आरके शर्मा का चेहरा भावहीन रहा। अदालत में जब उनके परिजन ने सांत्वना देने की कोशिश की तब भी उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

अदालत में मौजूद प्रदीप शर्मा के परिजन आदेश सुनाए जाने के बाद रो पड़े। शिवानी भटनागर 23 जनवरी, 1999 को पूर्वी दिल्ली के नवकुंज अपार्टमेंट्स स्थित अपने आवास में मृत पाई गई थी। मामले की जाँच में तीन साल लगे और सुनवाई 2003 में शुरू हुई।

पाँच साल चली सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए कुल 209 गवाहों से जिरह किया, जिनमें से 51 बयान से मुकर गए।

अभियोजन पक्ष ने अपने आरोपों की पुष्टि करने के लिए शिवानी और अन्य सह-आरोपियों के साथ आरके शर्मा की फोन पर बातचीत के रिकॉर्ड को आधार बनाया।

जाँच दल प्रमुख खुश : शिवानी भटनागर हत्याकांड में चार लोगों के दोषी ठहराए जाने पर वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और जाँच दल के प्रमुख यूके कटना ने खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले ने साबित कर दिया कि जाँच वैज्ञानिक तरीके से की गई थी।
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