भारत सरकार ने आज पाकिस्तान से भारतीय नागरिक सरबजीतसिंह को फाँसी नहीं देने की अपील की। विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी ने इस बारे में लोकसभा को दिए एक बयान में कहा कि हम पाकिस्तान सरकार से सरबजीतसिंह के मामले पर मानवीय आधार पर दया के साथ विचार करने की अपील करते हैं।
उन्होंने कहा कि सरबजीतसिंह को पाकिस्तान में मृत्युदंड की सजा सुनाई गई है और मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रपति मुशर्रफ ने उनकी दया याचिका को ठुकरा दिया है।
हालाँकि मुखर्जी ने कहा कि सरबजीत की दया याचिका ठुकराने के संबंध में पाकिस्तान सरकार से हमें कोई औपचारिक सूचना नहीं मिली है, लेकिन मीडिया की खबरों के अनुसार 'ब्लैक वारंट' जारी कर दिया गया है और सजा 1 अप्रैल 2008 को दी जाएगी। मुखर्जी ने कहा कि इन खबरों के मद्देनजर इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग ने पाकिस्तान सरकार से इस संबंध में ब्योरा माँगा है।
मुखर्जी ने सदन को बताया कि अनेक स्थानों पर विस्फोट के आरोप में सरबजीतसिंह को दी गई मृत्युदंड की सजा को पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने 18 अगस्त 2005 के अपने एक फैसले में बहाल रखा है।
उन्होंने कहा कि हमारे अनुरोध पर पहली बार 30 अगस्त 2005 को भारतीय उच्चायोग के जरिये सरबजीतसिंह को दूतावासीय संपर्क उपलब्ध कराया गया और उसकी राष्ट्रीयता की पुष्टि की गई। तत्पश्चात पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय में मृत्युदंड के खिलाफ एक समीक्षा याचिका भी दायर की गई, लेकिन मार्च 2006 में शीर्ष अदालत ने उसे खारिज कर दिया।
विदेशमंत्री ने बताया कि इसके बाद पाकिस्तान के राष्ट्रपति के समक्ष एक दया याचिका दायर की गई, जिसे अब समाचार रिपोर्टों के अनुसार ठुकरा दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस पूरी अवधि के दौरान भारत सरकार इस मामले पर पाकिस्तान से सहानुभूतिपूर्ण और मानवीय रवैया अपनाने का अनुरोध करती रही है।
संसदीय कार्यमंत्री प्रियरंजन दासमुंशी ने सदन को आश्वासन दिया कि सरबजीतसिंह की जान बचाने के लिए 'उच्च स्तर' पर हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा मैं सदन को आश्वासन देना चाहता हूँ कि प्रधानमंत्री के स्तर पर हर दिन, हर मिनट सरबजीत को बचाने का प्रयास जारी है।
दासमुंशी ने हालाँकि कि इस संदर्भ में सदन द्वारा एक प्रस्ताव पारित किए जाने के सदस्यों के सुझाव पर कहा कि किसी देश के शीर्ष न्यायालय के फैसले पर किसी अन्य देश की संसद द्वारा प्रस्ताव पारित किए जाने की परंपरा नहीं है, इसलिए ऐसा नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि सरकार के पास सरबजीत की जान बचाने के लिए कूटनीतिक और अन्य रास्ते मौजूद हैं, जिनका पूरी गंभीरता से इस्तेमाल किया जा रहा है। इस संदर्भ में सदन की भावना से वे प्रधानमंत्री को अवगत कराएँगे।
|