भारत-अमेरिका परमाणु करार पर सत्तारूढ़ संप्रग-वामदलों की समिति की सातवीं बैठक सोमवार को बेनतीजा रही, लेकिन वामपंथी पार्टियों ने करार पर अमल के लिए सरकार की ओर से किसी समय सीमा पर जोर नहीं दिए जाने पर संतोष जताया।
करार पर विपक्षी बैठक की सहमति के अनुसार सरकार ने भारत केन्द्रित परमाणु सुरक्षा उपायों पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) से हुई छह दौर की चर्चा के निष्कर्षों के मुख्य बिन्दुओं से वामदलों को यहाँ विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी के निवास पर एक बैठक में अवगत कराया, लेकिन करीब डेढ़ घंटे चली इस बैठक में निष्कर्षों को लेकर दोनों पक्षों में कोई सहमति नहीं बन सकी।
बैठक से निकलते हुए फारवर्ड ब्लॉक के महासचिव देवव्रत विश्वास ने कहा कि सरकार ने अभी परमाणु सुरक्षा समझौते का कोई मसौदा वामदलों को नहीं दिया है। दो एक सप्ताह में इसका ब्योरा मिलने के बाद इसके अध्ययन में भी समय तो लगेगा ही। वैसे बैठक के बाद जारी वक्तव्य में भी कहा गया है कि इस मुद्दे पर और चर्चा की जरूरत है लिहाजा समिति की अगली बैठक अगले महीने करने का फैसला किया गया है।
मुखर्जी ने माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य सीताराम येचुरी की मौजूदगी में तीन पैरे का वक्तव्य संवाददाताओं को पढ़कर सुनाया। इसमें कहा गया है कि समिति के सदस्यों को आईएईए के साथ हुई बातचीत के निष्कर्षों से अवगत कराया गया और सबकी राय थी कि इस पर और चर्चा की जरूरत है। कितनी चर्चा और जरूरी है और इस मुद्दे का समाधान कब तक हो सकता है, इस सवाल पर समिति के सदस्य एवं भाकपा महासचिव एबी बर्धन ने कहा- तीन महीने से ज्यादा भी लग सकते हैं। माकपा के महासचिव प्रकाश करात पहले ही कह चुके हैं कि आईएईए से परमाणु सुरक्षा समझौते का मसौदा एक तकनीकी दस्तावेज है और इसके अध्ययन में वाम दलों को कम से कम दो-तीन महीने तो लगेंगे ही।
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